Saturday, August 30, 2025

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सुप्रीम कोर्ट ने पहलवान सुशील कुमार की जमानत रद्द की एक हफ्ते के अंदर आत्मसमर्पण करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट में अशोक धनखड़ की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ मृदुल पेश हुए, जबकि सुशील कुमार का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने रखा।

नई दिल्ली, 13 अगस्त 2025 (यूटीएन)। सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक मामले में पहलवान सुशील कुमार की जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने उन्हें एक हफ्ते के अंदर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार पर पहलवान सागर धनकड़ की हत्या का मामला दर्ज किया गया था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी थी। यह आदेश सागर के पिता अशोक धनखड़ की याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने हाईकोर्ट के जमानत के आदेश को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट में अशोक धनखड़ की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ मृदुल पेश हुए, जबकि सुशील कुमार का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने रखा।
आपको बता दें कि 4 मई 2021 को दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम के पार्किंग क्षेत्र में सागर धनखड़ और उनके दो दोस्तों (सोनू और अमित कुमार) पर हमला हुआ था। आरोप है कि यह हमला सुशील कुमार और उनके साथियों ने संपत्ति विवाद के चलते किया गया। सागर धनखड़ हरियाणा के रोहतक का पहलवान था। हमले के बाद गंभीर रूप से घायल हो गया। उसकी मौत ब्लंट फोर्स ट्रॉमा से मस्तिष्क में हुए क्षति के कारण हुई। उसके दो साथी भी घायल हुए।
*18 दिनों तक फरार रहे सुशील कुमार*
इस घटना के बाद सुशील कुमार 18 दिनों तक पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा में घूमते रहे। 23 मई 2021 को दिल्ली पुलिस ने उन्हें मुंडका इलाके से गिरफ्तार किया, जब वे एक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी से ली गई स्कूटी पर नकदी लेने पहुंचे थे।
*रेलवे की नौकरी भी गई*
गिरफ्तारी के बाद उनसे उनकी रेलवे की नौकरी से निलंबित कर दिया गया। उन्होंने न्यायिक हिरासत में भेजा गया। अक्टूबर 2022 में कई धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत आरोप तय किए गए।
*दिल्ली हाईकोर्ट ने दी थी जमानत*
दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में सुशील को साजिश का मास्टरमाइंड बताया। पुलिस ने दावा किया कि उन्होंने कुश्ती समुदाय में अपना प्रभाव फिर से स्थापित करने के लिए हमला करवाया। सुशील कुमार ने इन आरोपों से इनकार किया और कहा कि वे पहले ही साढ़े तीन साल जेल में बिता चुके हैं। मुकदमे में अब तक 222 में से केवल 31 गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं। इन्हीं आधारों पर दिल्ली हाईकोर्ट ने मार्च 2024 में उन्हें जमानत दी थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है।
आपको बता दें कि सुशील कुमार ने बीजिंग ओलंपिक 2008 में कांस्य पदक जीता था। इसके बाद उन्होंने लंदन ओलंपिक 2012 में रजत पदक जीता था।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

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सुप्रीम कोर्ट ने पहलवान सुशील कुमार की जमानत रद्द की एक हफ्ते के अंदर आत्मसमर्पण करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट में अशोक धनखड़ की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ मृदुल पेश हुए, जबकि सुशील कुमार का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने रखा।

नई दिल्ली, 13 अगस्त 2025 (यूटीएन)। सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक मामले में पहलवान सुशील कुमार की जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने उन्हें एक हफ्ते के अंदर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार पर पहलवान सागर धनकड़ की हत्या का मामला दर्ज किया गया था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी थी। यह आदेश सागर के पिता अशोक धनखड़ की याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने हाईकोर्ट के जमानत के आदेश को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट में अशोक धनखड़ की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ मृदुल पेश हुए, जबकि सुशील कुमार का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने रखा।
आपको बता दें कि 4 मई 2021 को दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम के पार्किंग क्षेत्र में सागर धनखड़ और उनके दो दोस्तों (सोनू और अमित कुमार) पर हमला हुआ था। आरोप है कि यह हमला सुशील कुमार और उनके साथियों ने संपत्ति विवाद के चलते किया गया। सागर धनखड़ हरियाणा के रोहतक का पहलवान था। हमले के बाद गंभीर रूप से घायल हो गया। उसकी मौत ब्लंट फोर्स ट्रॉमा से मस्तिष्क में हुए क्षति के कारण हुई। उसके दो साथी भी घायल हुए।
*18 दिनों तक फरार रहे सुशील कुमार*
इस घटना के बाद सुशील कुमार 18 दिनों तक पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा में घूमते रहे। 23 मई 2021 को दिल्ली पुलिस ने उन्हें मुंडका इलाके से गिरफ्तार किया, जब वे एक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी से ली गई स्कूटी पर नकदी लेने पहुंचे थे।
*रेलवे की नौकरी भी गई*
गिरफ्तारी के बाद उनसे उनकी रेलवे की नौकरी से निलंबित कर दिया गया। उन्होंने न्यायिक हिरासत में भेजा गया। अक्टूबर 2022 में कई धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत आरोप तय किए गए।
*दिल्ली हाईकोर्ट ने दी थी जमानत*
दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में सुशील को साजिश का मास्टरमाइंड बताया। पुलिस ने दावा किया कि उन्होंने कुश्ती समुदाय में अपना प्रभाव फिर से स्थापित करने के लिए हमला करवाया। सुशील कुमार ने इन आरोपों से इनकार किया और कहा कि वे पहले ही साढ़े तीन साल जेल में बिता चुके हैं। मुकदमे में अब तक 222 में से केवल 31 गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं। इन्हीं आधारों पर दिल्ली हाईकोर्ट ने मार्च 2024 में उन्हें जमानत दी थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है।
आपको बता दें कि सुशील कुमार ने बीजिंग ओलंपिक 2008 में कांस्य पदक जीता था। इसके बाद उन्होंने लंदन ओलंपिक 2012 में रजत पदक जीता था।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

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