Monday, January 5, 2026

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प्रगति: सुस्त रफ्तार की वजह से कुख्यात 85 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स ने पकड़ी रफ्तार

जम्मू- उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक की जो हमने ऊपर बात की वह 42,760 करोड़ रुपये की परियोजना थी, यह प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग के लिए बहुत बड़ी चुनौती रही है।

नई दिल्ली, 3 जनवरी 2026 (यूटीएन)। जम्मू- उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक का 40 प्रतिशत हिस्सा पूरा होने में 20 साल से ज्यादा लग गए। बाकी का 60 प्रतिशत काम 11 साल से भी कम समय में पूरा कर लिया गया। इसे ‘प्रगति’ की रफ्तार कह सकते हैं। यही नहीं, देश में ऐसी हजारों परियोजनाएं हैं, जिनकी कुल लागत 85 लाख करोड़ रुपये है, जो अपनी सुस्त रफ्तार की वजह से कुख्यात थे। लेकिन, अब ये प्रोजेक्ट बहुत ही तेजी से पूरे हुए हैं और जल्द पूरे होने की कतार में हैं। यह संभव हुआ है प्रगति की वजह से जिसका मतलब है, प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लिमेंटेशन। यह प्रयोग गुजरात में पहले से ही सफल रहा है, जो स्वागत के नाम से जाना जाता है।
*2049 में बनता नवी मुंबई एयरपोर्ट*
जम्मू- उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक की जो हमने ऊपर बात की वह 42,760 करोड़ रुपये की परियोजना थी। यह प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग के लिए बहुत बड़ी चुनौती रही है। क्योंकि, इसमें हिमालय काटकर 38 सुरंगे बनी हैं और 943 पुलों का निर्माण हुआ है। अगर ‘प्रगति’ के तहत इसके काम में रफ्तार नहीं लाई जाती तो यह पहले की गति में 2038 तक पूरा होने वाला था। इसी तरह से अगर ‘प्रगति’ पहल के तहत सुस्त प्रोजेक्ट की सुस्ती की वजह की पड़ताल नहीं की गई होती और उसका समाधान नहीं ढूंढ़ा गया होता, तो नवी मुंबई एयरपोर्ट 2049 से पहले चालू नहीं हो पाता।
*प्रगति’ में 7,156 मुद्दों का समाधान*
इस तरह की रेलवे लाइनें और एयरपोर्ट उन 3,300 से ज्यादा प्रोजेक्ट में शामिल हैं, जो 85 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं हैं और इन्हें जल्द पूरा करने के लिए इन्हें ‘प्रगति’ के दायरे में लाया गया। कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने कहा है कि ‘प्रगति’ के तहत 50 बैठकें हुईं और यहां इन परियोजनाओं से जुड़े 7,735 मुद्दे सामने लाए गए और उनमें से 7,156 का समाधान कर दिया गया।
*पीएम ने की 382 प्रोजेक्ट की समीक्षा*
कैबिनेट सचिव के अनुसार जिन 7,156 मुद्दों का समाधान निकाला गया, उनमें 35 प्रतिशत जमीन अधिग्रहण, 20 प्रतिशत जंगल, वन्यजीव और पर्यावरण, 18 प्रतिशत इस्तेमाल के अधिकार या रास्ते के अधिकार से जुड़े मुद्दे थे, और बाकी कानून-व्यवस्था, निर्माण, बिजली से जुड़ी मंजूरी और वित्तीय मसले थे, जिन्हें सुलझाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इनमें से 382 प्रोजेक्ट्स का रिव्यू किया और उठाए गए 3,187 मुद्दों में से 2,958 का हल निकाला गया। इस प्लेटफॉर्म पर 61 प्रमुख सरकारी योजनाओं की भी समीक्षा की गई। इनमें वन नेशन-वन राशन कार्ड, पीएम जन आरोग्य योजना, पीएम आवास योजना, पीएम स्वनिधि और स्वच्छ भारत मिशन जैसी बड़ी योजनाएं शामिल हैं।
*प्रगति’ की शुरुआत कब हुई?*
प्रगति प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लिमेंटेशन जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है कि इस पहल की शुरुआत ज्यादा सक्रिय होकर प्रोजेक्ट को समय पर लागू करने के लिए की गई है। इसे पीएम मोदी के सरकार में आने के एक साल पूरे होने से भी पहले 25 मार्च, 2015 को लॉन्च किया गया था। इस पहल की चर्चा देश में ही नहीं, विदेशों में भी होती है और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने इससे जुड़े प्रोजेक्ट में इसकी वजह से आई रफ्तार पर एक पूरी स्टडी भी की है।
गुजरात में भी सफल हुआ ‘स्वागत
दरअसल, जब नरेंद्र मोदी इस दशक की शुरुआत में गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे, तो उन्होंने कुछ समय बाद ही साल 2003 में ‘स्वागत’-स्टेट वाईड अटेंशन ओन ग्रिव्यांसेज बाई एप्लिकेशन आफ टेक्नालॉजी नाम का प्लेटफॉर्म लॉन्च किया था। इस प्रोजेक्ट के नाम से भी साफ है कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किस तरह से शिकायतों के निवारण के लिए किया जाना शुरू किया गया। गुजरात में भी इसे जल्द ही सफलता मिलनी शुरू हो गई थी।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

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प्रगति: सुस्त रफ्तार की वजह से कुख्यात 85 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स ने पकड़ी रफ्तार

जम्मू- उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक की जो हमने ऊपर बात की वह 42,760 करोड़ रुपये की परियोजना थी, यह प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग के लिए बहुत बड़ी चुनौती रही है।

नई दिल्ली, 3 जनवरी 2026 (यूटीएन)। जम्मू- उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक का 40 प्रतिशत हिस्सा पूरा होने में 20 साल से ज्यादा लग गए। बाकी का 60 प्रतिशत काम 11 साल से भी कम समय में पूरा कर लिया गया। इसे ‘प्रगति’ की रफ्तार कह सकते हैं। यही नहीं, देश में ऐसी हजारों परियोजनाएं हैं, जिनकी कुल लागत 85 लाख करोड़ रुपये है, जो अपनी सुस्त रफ्तार की वजह से कुख्यात थे। लेकिन, अब ये प्रोजेक्ट बहुत ही तेजी से पूरे हुए हैं और जल्द पूरे होने की कतार में हैं। यह संभव हुआ है प्रगति की वजह से जिसका मतलब है, प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लिमेंटेशन। यह प्रयोग गुजरात में पहले से ही सफल रहा है, जो स्वागत के नाम से जाना जाता है।
*2049 में बनता नवी मुंबई एयरपोर्ट*
जम्मू- उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक की जो हमने ऊपर बात की वह 42,760 करोड़ रुपये की परियोजना थी। यह प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग के लिए बहुत बड़ी चुनौती रही है। क्योंकि, इसमें हिमालय काटकर 38 सुरंगे बनी हैं और 943 पुलों का निर्माण हुआ है। अगर ‘प्रगति’ के तहत इसके काम में रफ्तार नहीं लाई जाती तो यह पहले की गति में 2038 तक पूरा होने वाला था। इसी तरह से अगर ‘प्रगति’ पहल के तहत सुस्त प्रोजेक्ट की सुस्ती की वजह की पड़ताल नहीं की गई होती और उसका समाधान नहीं ढूंढ़ा गया होता, तो नवी मुंबई एयरपोर्ट 2049 से पहले चालू नहीं हो पाता।
*प्रगति’ में 7,156 मुद्दों का समाधान*
इस तरह की रेलवे लाइनें और एयरपोर्ट उन 3,300 से ज्यादा प्रोजेक्ट में शामिल हैं, जो 85 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं हैं और इन्हें जल्द पूरा करने के लिए इन्हें ‘प्रगति’ के दायरे में लाया गया। कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने कहा है कि ‘प्रगति’ के तहत 50 बैठकें हुईं और यहां इन परियोजनाओं से जुड़े 7,735 मुद्दे सामने लाए गए और उनमें से 7,156 का समाधान कर दिया गया।
*पीएम ने की 382 प्रोजेक्ट की समीक्षा*
कैबिनेट सचिव के अनुसार जिन 7,156 मुद्दों का समाधान निकाला गया, उनमें 35 प्रतिशत जमीन अधिग्रहण, 20 प्रतिशत जंगल, वन्यजीव और पर्यावरण, 18 प्रतिशत इस्तेमाल के अधिकार या रास्ते के अधिकार से जुड़े मुद्दे थे, और बाकी कानून-व्यवस्था, निर्माण, बिजली से जुड़ी मंजूरी और वित्तीय मसले थे, जिन्हें सुलझाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इनमें से 382 प्रोजेक्ट्स का रिव्यू किया और उठाए गए 3,187 मुद्दों में से 2,958 का हल निकाला गया। इस प्लेटफॉर्म पर 61 प्रमुख सरकारी योजनाओं की भी समीक्षा की गई। इनमें वन नेशन-वन राशन कार्ड, पीएम जन आरोग्य योजना, पीएम आवास योजना, पीएम स्वनिधि और स्वच्छ भारत मिशन जैसी बड़ी योजनाएं शामिल हैं।
*प्रगति’ की शुरुआत कब हुई?*
प्रगति प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लिमेंटेशन जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है कि इस पहल की शुरुआत ज्यादा सक्रिय होकर प्रोजेक्ट को समय पर लागू करने के लिए की गई है। इसे पीएम मोदी के सरकार में आने के एक साल पूरे होने से भी पहले 25 मार्च, 2015 को लॉन्च किया गया था। इस पहल की चर्चा देश में ही नहीं, विदेशों में भी होती है और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने इससे जुड़े प्रोजेक्ट में इसकी वजह से आई रफ्तार पर एक पूरी स्टडी भी की है।
गुजरात में भी सफल हुआ ‘स्वागत
दरअसल, जब नरेंद्र मोदी इस दशक की शुरुआत में गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे, तो उन्होंने कुछ समय बाद ही साल 2003 में ‘स्वागत’-स्टेट वाईड अटेंशन ओन ग्रिव्यांसेज बाई एप्लिकेशन आफ टेक्नालॉजी नाम का प्लेटफॉर्म लॉन्च किया था। इस प्रोजेक्ट के नाम से भी साफ है कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किस तरह से शिकायतों के निवारण के लिए किया जाना शुरू किया गया। गुजरात में भी इसे जल्द ही सफलता मिलनी शुरू हो गई थी।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

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