Saturday, August 30, 2025

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केंद्रीय कैबिनेट: पीएम स्वनिधि योजना का विस्तार,राष्ट्रमंडल खेल के लिए बोली लगाने के लिए मंजूरी

लेन-देन पर डिजिटल भुगतान का विकल्प चुनने वाले विक्रेताओं को 1600 रुपये तक का प्रोत्साहन भी दिया जाएगा, अब नई योजना के तहत 50 लाख नए स्ट्रीट वेंडरों सहित 1.15 करोड़ लाभार्थियों को लाभान्वित किया जाएगा।

नई दिल्ली, 27 अगस्त  2025  (यूटीएन)। रेहड़ी-पटरी दुकानदारों को अब ज्यादा लोन मिलेगा। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना का विस्तार कर दिया है। योजना को 31 मार्च 2030 तक बढ़ाया गया है। साथ ही इसका बजट अब 7,332 करोड़ रुपये होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में योजना के पुनर्गठन को मंजूरी दी गई। इसमें कहा गया है कि योजना के तहत पहली किस्त की ऋण सीमा 10,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दी गई है। जबकि दूसरी किस्त 20,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये की गई है। तीसरी किस्त 50,000 रुपये पर रहेगी। समय पर अपना दूसरा ऋण चुकाने वाले स्ट्रीट वेंडर्स को आकस्मिक व्यावसायिक और व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड दिया जाएगा।
इसके अलावा खुदरा और थोक लेन-देन पर डिजिटल भुगतान का विकल्प चुनने वाले विक्रेताओं को 1600 रुपये तक का प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। अब नई योजना के तहत 50 लाख नए स्ट्रीट वेंडरों सहित 1.15 करोड़ लाभार्थियों को लाभान्वित किया जाएगा। योजना का कार्यान्वयन आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) और वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) की संयुक्त जिम्मेदारी होगी। आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय योजना का संचालन करेगा। जबकि डीएफएस बैंकों और वित्तीय संस्थानों के माध्यम से ऋण और क्रेडिट कार्ड तक पहुंच को सुगम बनाएगा। बयान में कहा गया है कि योजना में बढ़ी हुई ऋण राशि के साथ यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड, डिजिटल कैशबैक प्रोत्साहन और व्यापक भौगोलिक कवरेज दिया जाएगा। इसके साथ ही योजना के तहत एफएसएसएआई के साथ साझेदारी में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए मानक स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।
*कोविड के दौरान शुरू की गई थी योजना*
केंद्र सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान  कठिनाइयों का सामना करने वाले स्ट्रीट वेंडरों की सहायता के लिए एक जून 2020 को पीएम स्वनिधि योजना शुरू की थी। योजना के तहत 30 जुलाई तक 68 लाख से ज्यादा रेहड़ी-पटरी वालों को 13,797 करोड़ रुपये का 96 लाख से ज्यादा ऋण वितरित किया जा चुका है। लगभग 47 लाख डिजिटल रूप से सक्रिय लाभार्थियों ने 6.09 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 557 करोड़ से अधिक डिजिटल लेन-देन किए हैं, जिससे उन्हें कुल 241 करोड़ रुपये का कैशबैक प्राप्त हुआ है।
*राष्ट्रमंडल खेल 2030 के लिए बोली लगाने के लिए मंजूरी दी*
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रमंडल खेल (सीडब्ल्यूजी) 2030 के लिए बोली प्रस्तुत करने के लिए युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। मंत्रिमंडल ने सम्बंधित मंत्रालयों, विभागों और प्राधिकरणों से आवश्यक गारंटी के साथ मेजबान सहयोग समझौते (एचसीए) पर हस्ताक्षर करने और बोली स्वीकार होने की स्थिति में गुजरात सरकार को आवश्यक अनुदान सहायता के लिए भी मंजूरी दे दी। राष्ट्रमंडल खेलों में 72 देशों के एथलीट भाग लेंगे। खेलों के दौरान भारत आने वालों में बड़ी संख्या में एथलीट, कोच, तकनीकी अधिकारी, पर्यटक, मीडियाकर्मी और अन्य लोग भी शामिल होंगे। इससे स्थानीय व्यवसायों को लाभ होगा और राजस्व में वृद्धि होगी।
अहमदाबाद विश्व स्तरीय स्टेडियमों, अत्याधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं और एक जोशीली खेल संस्कृति वाला आदर्श मेज़बान शहर है। 2023 आईसीसी क्रिकेट विश्व कप फ़ाइनल की सफलतापूर्वक मेज़बानी करने वाला नरेन्द्र मोदी स्टेडियम, दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम है। खेलों के अलावा, भारत में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, रोज़गार के अवसर पैदा होंगे और लाखों युवा एथलीटों को प्रेरणा मिलेगी।
इसके अलावा, खेल विज्ञान, आयोजन संचालन एवं प्रबंधन, रसद एवं परिवहन समन्वयक, प्रसारण एवं मीडिया, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार, जनसंपर्क एवं संचार तथा अन्य क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में पेशेवरों को अवसर मिलेंगे। इस तरह के विश्व-प्रतिष्ठित आयोजन से राष्ट्रीय गौरव और एकता की भावना प्रबल होगी। इस आयोजन में देश के सभी हिस्सों के लोग शामिल होंगे जिससे हमारे राष्ट्र का मनोबल बढ़ेगा। यह खिलाडियों की नई पीढ़ी को खेलों को एक करियर विकल्प के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करेगा और सभी स्तरों पर खेलों में अधिक से अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करेगा।
*रेल मंत्रालय की चार परियोजनाओं को मंज़ूरी दी*
कैबिनेट ने कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और असम को लाभान्वित करने वाली तीन परियोजनाओं के मल्टी-ट्रैकिंग और गुजरात के कच्छ के दूर-दराज के इलाकों को जोड़ने के लिए एक नई रेल लाइन को मंज़ूरी दी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रेल मंत्रालय की चार परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिनकी कुल लागत लगभग 12,328 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं में शामिल हैं: –
(1) देशलपर – हाजीपीर – लूना और वयोर – लखपत नई लाइन
(2) सिकंदराबाद (सनथनगर) – वादी तीसरी और चौथी लाइन
(3) भागलपुर – जमालपुर तीसरी लाइन
(4) फुरकाटिंग – नई तिनसुकिया दोहरीकरण
उपरोक्त परियोजनाओं का उद्देश्य यात्रियों और माल दोनों का निर्बाध और तेज़ परिवहन सुनिश्चित करना है। ये पहल कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी और यात्रा सुविधा में सुधार के साथ-साथ रसद लागत को कम करेंगी और तेल आयात पर निर्भरता कम करेंगी। इसके अतिरिक्त, ये परियोजनाएँ सीओ 2 उत्सर्जन को कम करने में योगदान देंगी, जिससे टिकाऊ और कुशल रेल संचालन को बढ़ावा मिलेगा। ये परियोजनाएँ अपने निर्माण के दौरान लगभग 251 (दो सौ इक्यावन) लाख मानव-दिवसों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा करेंगी।
प्रस्तावित नई लाइन कच्छ क्षेत्र के सुदूर इलाकों को कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। यह गुजरात के मौजूदा रेलवे नेटवर्क में 145 रूट किमी और 164 ट्रैक किमी जोड़ेगी, जिसकी अनुमानित लागत 2526 करोड़ रुपये है। परियोजना की पूर्ण होने की समय-सीमा 3 वर्ष है। गुजरात राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के अलावा, नई रेल लाइन नमक, सीमेंट, कोयला, क्लिंकर और बेंटोनाइट के परिवहन में मदद करेगी। इस परियोजना का रणनीतिक महत्व यह है कि यह कच्छ के रण को कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। हड़प्पा स्थल धोलावीरा, कोटेश्वर मंदिर, नारायण सरोवर और लखपत किला भी रेल नेटवर्क के अंतर्गत आएंगे क्योंकि 13 नए रेलवे स्टेशन जोड़े जाएँगे जिससे 866 गाँवों और लगभग 16 लाख आबादी को लाभ होगा।
कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए, स्वीकृत मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएँ लगभग 3,108 गाँवों और लगभग 47.34 लाख आबादी और एक आकांक्षी जिले (कलबुर्गी) तक कनेक्टिविटी बढ़ाएँगी जिससे कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और असम राज्यों को लाभ होगा। कर्नाटक और तेलंगाना में फैली 173 किलोमीटर लंबी सिकंदराबाद (सनथनगर)-वाडी तीसरी और चौथी लाइन, जिसकी लागत 5012 करोड़ रुपये है, के पूरा होने की समय-सीमा पाँच वर्ष है, जबकि बिहार में 53 किलोमीटर लंबी भागलपुर-जमालपुर तीसरी लाइन के लिए यह अवधि तीन वर्ष है, जिसकी लागत 1156 करोड़ रुपये है। 194 किलोमीटर लंबी फुरकेटिंग-न्यू तिनसुकिया दोहरीकरण परियोजना, जिसकी लागत 3634 करोड़ रुपये है, चार वर्षों में पूरी होगी। बढ़ी हुई लाइन क्षमता से गतिशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा।
ये मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ को कम करने के लिए तैयार हैं। ये परियोजनाएँ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी के नए भारत के विजन के अनुरूप हैं, जो क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से “आत्मनिर्भर” बनाएगा और उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाएगा। ये परियोजनाएँ पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाई गई हैं, जिनका उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और असम राज्यों के 13 जिलों को कवर करने वाली ये चार परियोजनाएँ भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 565 किलोमीटर तक बढ़ा देंगी। ये कोयला, सीमेंट, क्लिंकर, फ्लाईऐश, स्टील, कंटेनर, उर्वरक, कृषि वस्तुओं और पेट्रोलियम उत्पादों आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं।
क्षमता वृद्धि कार्यों के परिणामस्वरूप 68 मिलियन टन प्रति वर्ष का अतिरिक्त माल यातायात होगा। रेलवे, पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन का साधन होने के कारण, जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की लॉजिस्टिक लागत को कम करने, तेल आयात (56 करोड़ लीटर) को कम करने और CO2 उत्सर्जन (360 करोड़ किलोग्राम) को कम करने में मदद करेगा, जो 14 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। प्रस्तावित परियोजनाओं का उद्देश्य कोयला, कंटेनर, सीमेंट, कृषि वस्तुओं, ऑटोमोबाइल, पीओएल, लोहा एवं इस्पात तथा अन्य वस्तुओं के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण मार्गों पर लाइन क्षमता बढ़ाकर रसद दक्षता में वृद्धि करना है। इन सुधारों से आपूर्ति श्रृंखलाओं के अनुकूलन और त्वरित आर्थिक विकास में सहायता मिलने की उम्मीद है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

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केंद्रीय कैबिनेट: पीएम स्वनिधि योजना का विस्तार,राष्ट्रमंडल खेल के लिए बोली लगाने के लिए मंजूरी

लेन-देन पर डिजिटल भुगतान का विकल्प चुनने वाले विक्रेताओं को 1600 रुपये तक का प्रोत्साहन भी दिया जाएगा, अब नई योजना के तहत 50 लाख नए स्ट्रीट वेंडरों सहित 1.15 करोड़ लाभार्थियों को लाभान्वित किया जाएगा।

नई दिल्ली, 27 अगस्त  2025  (यूटीएन)। रेहड़ी-पटरी दुकानदारों को अब ज्यादा लोन मिलेगा। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना का विस्तार कर दिया है। योजना को 31 मार्च 2030 तक बढ़ाया गया है। साथ ही इसका बजट अब 7,332 करोड़ रुपये होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में योजना के पुनर्गठन को मंजूरी दी गई। इसमें कहा गया है कि योजना के तहत पहली किस्त की ऋण सीमा 10,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दी गई है। जबकि दूसरी किस्त 20,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये की गई है। तीसरी किस्त 50,000 रुपये पर रहेगी। समय पर अपना दूसरा ऋण चुकाने वाले स्ट्रीट वेंडर्स को आकस्मिक व्यावसायिक और व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड दिया जाएगा।
इसके अलावा खुदरा और थोक लेन-देन पर डिजिटल भुगतान का विकल्प चुनने वाले विक्रेताओं को 1600 रुपये तक का प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। अब नई योजना के तहत 50 लाख नए स्ट्रीट वेंडरों सहित 1.15 करोड़ लाभार्थियों को लाभान्वित किया जाएगा। योजना का कार्यान्वयन आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) और वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) की संयुक्त जिम्मेदारी होगी। आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय योजना का संचालन करेगा। जबकि डीएफएस बैंकों और वित्तीय संस्थानों के माध्यम से ऋण और क्रेडिट कार्ड तक पहुंच को सुगम बनाएगा। बयान में कहा गया है कि योजना में बढ़ी हुई ऋण राशि के साथ यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड, डिजिटल कैशबैक प्रोत्साहन और व्यापक भौगोलिक कवरेज दिया जाएगा। इसके साथ ही योजना के तहत एफएसएसएआई के साथ साझेदारी में रेहड़ी-पटरी वालों के लिए मानक स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।
*कोविड के दौरान शुरू की गई थी योजना*
केंद्र सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान  कठिनाइयों का सामना करने वाले स्ट्रीट वेंडरों की सहायता के लिए एक जून 2020 को पीएम स्वनिधि योजना शुरू की थी। योजना के तहत 30 जुलाई तक 68 लाख से ज्यादा रेहड़ी-पटरी वालों को 13,797 करोड़ रुपये का 96 लाख से ज्यादा ऋण वितरित किया जा चुका है। लगभग 47 लाख डिजिटल रूप से सक्रिय लाभार्थियों ने 6.09 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 557 करोड़ से अधिक डिजिटल लेन-देन किए हैं, जिससे उन्हें कुल 241 करोड़ रुपये का कैशबैक प्राप्त हुआ है।
*राष्ट्रमंडल खेल 2030 के लिए बोली लगाने के लिए मंजूरी दी*
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रमंडल खेल (सीडब्ल्यूजी) 2030 के लिए बोली प्रस्तुत करने के लिए युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। मंत्रिमंडल ने सम्बंधित मंत्रालयों, विभागों और प्राधिकरणों से आवश्यक गारंटी के साथ मेजबान सहयोग समझौते (एचसीए) पर हस्ताक्षर करने और बोली स्वीकार होने की स्थिति में गुजरात सरकार को आवश्यक अनुदान सहायता के लिए भी मंजूरी दे दी। राष्ट्रमंडल खेलों में 72 देशों के एथलीट भाग लेंगे। खेलों के दौरान भारत आने वालों में बड़ी संख्या में एथलीट, कोच, तकनीकी अधिकारी, पर्यटक, मीडियाकर्मी और अन्य लोग भी शामिल होंगे। इससे स्थानीय व्यवसायों को लाभ होगा और राजस्व में वृद्धि होगी।
अहमदाबाद विश्व स्तरीय स्टेडियमों, अत्याधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं और एक जोशीली खेल संस्कृति वाला आदर्श मेज़बान शहर है। 2023 आईसीसी क्रिकेट विश्व कप फ़ाइनल की सफलतापूर्वक मेज़बानी करने वाला नरेन्द्र मोदी स्टेडियम, दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम है। खेलों के अलावा, भारत में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, रोज़गार के अवसर पैदा होंगे और लाखों युवा एथलीटों को प्रेरणा मिलेगी।
इसके अलावा, खेल विज्ञान, आयोजन संचालन एवं प्रबंधन, रसद एवं परिवहन समन्वयक, प्रसारण एवं मीडिया, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार, जनसंपर्क एवं संचार तथा अन्य क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में पेशेवरों को अवसर मिलेंगे। इस तरह के विश्व-प्रतिष्ठित आयोजन से राष्ट्रीय गौरव और एकता की भावना प्रबल होगी। इस आयोजन में देश के सभी हिस्सों के लोग शामिल होंगे जिससे हमारे राष्ट्र का मनोबल बढ़ेगा। यह खिलाडियों की नई पीढ़ी को खेलों को एक करियर विकल्प के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करेगा और सभी स्तरों पर खेलों में अधिक से अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करेगा।
*रेल मंत्रालय की चार परियोजनाओं को मंज़ूरी दी*
कैबिनेट ने कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और असम को लाभान्वित करने वाली तीन परियोजनाओं के मल्टी-ट्रैकिंग और गुजरात के कच्छ के दूर-दराज के इलाकों को जोड़ने के लिए एक नई रेल लाइन को मंज़ूरी दी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रेल मंत्रालय की चार परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिनकी कुल लागत लगभग 12,328 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं में शामिल हैं: –
(1) देशलपर – हाजीपीर – लूना और वयोर – लखपत नई लाइन
(2) सिकंदराबाद (सनथनगर) – वादी तीसरी और चौथी लाइन
(3) भागलपुर – जमालपुर तीसरी लाइन
(4) फुरकाटिंग – नई तिनसुकिया दोहरीकरण
उपरोक्त परियोजनाओं का उद्देश्य यात्रियों और माल दोनों का निर्बाध और तेज़ परिवहन सुनिश्चित करना है। ये पहल कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी और यात्रा सुविधा में सुधार के साथ-साथ रसद लागत को कम करेंगी और तेल आयात पर निर्भरता कम करेंगी। इसके अतिरिक्त, ये परियोजनाएँ सीओ 2 उत्सर्जन को कम करने में योगदान देंगी, जिससे टिकाऊ और कुशल रेल संचालन को बढ़ावा मिलेगा। ये परियोजनाएँ अपने निर्माण के दौरान लगभग 251 (दो सौ इक्यावन) लाख मानव-दिवसों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा करेंगी।
प्रस्तावित नई लाइन कच्छ क्षेत्र के सुदूर इलाकों को कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। यह गुजरात के मौजूदा रेलवे नेटवर्क में 145 रूट किमी और 164 ट्रैक किमी जोड़ेगी, जिसकी अनुमानित लागत 2526 करोड़ रुपये है। परियोजना की पूर्ण होने की समय-सीमा 3 वर्ष है। गुजरात राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के अलावा, नई रेल लाइन नमक, सीमेंट, कोयला, क्लिंकर और बेंटोनाइट के परिवहन में मदद करेगी। इस परियोजना का रणनीतिक महत्व यह है कि यह कच्छ के रण को कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। हड़प्पा स्थल धोलावीरा, कोटेश्वर मंदिर, नारायण सरोवर और लखपत किला भी रेल नेटवर्क के अंतर्गत आएंगे क्योंकि 13 नए रेलवे स्टेशन जोड़े जाएँगे जिससे 866 गाँवों और लगभग 16 लाख आबादी को लाभ होगा।
कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए, स्वीकृत मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएँ लगभग 3,108 गाँवों और लगभग 47.34 लाख आबादी और एक आकांक्षी जिले (कलबुर्गी) तक कनेक्टिविटी बढ़ाएँगी जिससे कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और असम राज्यों को लाभ होगा। कर्नाटक और तेलंगाना में फैली 173 किलोमीटर लंबी सिकंदराबाद (सनथनगर)-वाडी तीसरी और चौथी लाइन, जिसकी लागत 5012 करोड़ रुपये है, के पूरा होने की समय-सीमा पाँच वर्ष है, जबकि बिहार में 53 किलोमीटर लंबी भागलपुर-जमालपुर तीसरी लाइन के लिए यह अवधि तीन वर्ष है, जिसकी लागत 1156 करोड़ रुपये है। 194 किलोमीटर लंबी फुरकेटिंग-न्यू तिनसुकिया दोहरीकरण परियोजना, जिसकी लागत 3634 करोड़ रुपये है, चार वर्षों में पूरी होगी। बढ़ी हुई लाइन क्षमता से गतिशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा।
ये मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ को कम करने के लिए तैयार हैं। ये परियोजनाएँ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी के नए भारत के विजन के अनुरूप हैं, जो क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से “आत्मनिर्भर” बनाएगा और उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाएगा। ये परियोजनाएँ पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाई गई हैं, जिनका उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और असम राज्यों के 13 जिलों को कवर करने वाली ये चार परियोजनाएँ भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 565 किलोमीटर तक बढ़ा देंगी। ये कोयला, सीमेंट, क्लिंकर, फ्लाईऐश, स्टील, कंटेनर, उर्वरक, कृषि वस्तुओं और पेट्रोलियम उत्पादों आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं।
क्षमता वृद्धि कार्यों के परिणामस्वरूप 68 मिलियन टन प्रति वर्ष का अतिरिक्त माल यातायात होगा। रेलवे, पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन का साधन होने के कारण, जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की लॉजिस्टिक लागत को कम करने, तेल आयात (56 करोड़ लीटर) को कम करने और CO2 उत्सर्जन (360 करोड़ किलोग्राम) को कम करने में मदद करेगा, जो 14 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। प्रस्तावित परियोजनाओं का उद्देश्य कोयला, कंटेनर, सीमेंट, कृषि वस्तुओं, ऑटोमोबाइल, पीओएल, लोहा एवं इस्पात तथा अन्य वस्तुओं के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण मार्गों पर लाइन क्षमता बढ़ाकर रसद दक्षता में वृद्धि करना है। इन सुधारों से आपूर्ति श्रृंखलाओं के अनुकूलन और त्वरित आर्थिक विकास में सहायता मिलने की उम्मीद है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

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