Sunday, August 31, 2025

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विपक्ष के मार्च में बवाल: हिरासत में लिए गए राहुल-प्रियंका समेत कई सांसद

पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे सांसदों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब सांसदों ने सड़क से हटने से इनकार किया तो राहुल-प्रियंका गांधी समेत तमाम नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। 

नई दिल्ली, 11 अगस्त  2025  (यूटीएन)। बिहार में मतदाता सूची संशोधन के विरोध में विपक्षी सांसदों ने संसद भवन से चुनाव आयोग कार्यालय तक विरोध मार्च शुरू किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी विपक्षी सांसदों को रोकने के लिए परिवहन भवन में पुलिस बैरिकेड्स लगा दिए। यहां उन्हें चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर आगे बढ़ने से  रोक दिया गया। पुलिस का कहना है कि विपक्षी सांसदों की ओर से इस मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी।
पुलिस की ओर से रोके जाने के बाद अखिलेश यादव, महुआ मोइत्रा समेत कई सांसदों ने बैरिकेड्स पर चढ़ने की कोशिश। कुछ सांसद बैरिकेड्स कूदकर बीच सड़क पर धरने पर बैठ गए। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे सांसदों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब सांसदों ने सड़क से हटने से इनकार किया तो राहुल-प्रियंका गांधी समेत तमाम नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। 
*विपक्ष का मार्च क्यों?*
मल्लिकार्जुन खरगे  और शरद पवार समेत विपक्षी सांसदों ने सोमवार को बिहार में मतदाता सूची संशोधन के विरोध में संसद भवन से चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च निकाला। हालांकि, पुलिस ने उन्हें परिवहन भवन के पास बीच रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस की ओर से सांसदों को आगे बढ़ने से रोके जाने पर कई नेता सड़क पर ही बैठ गए और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया और ‘वोट चोरी’ के आरोपों के विरोध में नारे लगाने लगे। उन्होंने पोस्टर लिए और एसआईआर को वापस लेने की मांग करते हुए नारे लगाए।
‘एसआईआर’ और ‘वोट चोरी’ लिखी हुई लाल क्रॉस वाली सफेद टोपी पहने प्रदर्शनकारी सांसदों ने तख्तियां और बैनर लहराकर एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ नारे लगाए। इससे पहले संसद के मकर द्वार पर विरोध मार्च शुरू करने से पहले उन्होंने राष्ट्रगान गाया। मार्च में शामिल होने वालों में प्रमुख रूप से टीआर बालू (द्रमुक), संजय राउत (शिवसेना-यूबीटी), डेरेक ओब्रायन (टीएमसी), कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव समेत द्रमुक, राजद और वामपंथी दलों जैसे विपक्षी दलों के अन्य सांसद शामिल थे। 
 *पुलिस ने क्यों रोका?*
दरअसल, चुनाव आयोग ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश को पत्र लिखकर दोपहर 12.30 बजे मिलने के लिए बुलाया था। चुनाव आयोग ने उनसे 30 सांसदों के साथ आने को कहा था और आने से पहले उन सांसदों की सूचना देने की बात कही थी। इसी के मद्देनजर पुलिस ने प्रदर्शनकारी सांसदों से कहा कि 30 लोग चुनाव आयोग के दफ्तर तक जा सकते हैं। इसके लिए पैदल या वाहन जैसे विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि, विपक्ष इसके लिए तैयार नहीं हुआ। पुलिस ने यह भी बताया कि मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। इससे पहले पुलिस ने प्रदर्शनकारी सांसदों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए संसद मार्ग पर परिवहन भवन के पास व्यापक व्यवस्था की थी। इस दौरान बैरिकेड्स लगाए गए थे। पुलिस ने सांसदों से आगे न बढ़ने को कहा। इस दौरान लाउडस्पीकर से घोषणा की गई। उन्हें संसद भवन से कुछ ही दूरी पर स्थित चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर बढ़ने से रोका गया।
*पुलिस बैरिकेड के ऊपर से कूद गए अखिलेश*
इस दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पुलिस बैरिकेड के ऊपर से कूद गए। वे बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान मतदाता धोखाधड़ी के आरोपों में विपक्षी गठबंधन के विरोध मार्च के तहत संसद से भारत के चुनाव आयोग तक मार्च कर रहे थे।
उन्हें बीच में ही दिल्ली पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद अखिलेश बैरिकेड के ऊपर से कूद गए और अन्य साथियों के साथ बीच सड़क पर धरने पर बैठ गए।
*’हमें रोकने के लिए पुलिस का इस्तेमाल’*
समाजवादी पार्टी प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि पुलिस विपक्षी सांसदों को भारत के चुनाव आयोग की ओर मार्च करने से रोक रही थी। इस वजह से वे विरोध प्रदर्शन करने के लिए बैठ गए। उन्होंने सरकार पर निशाना साधा और कहा कि वे हमें रोकने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रहे हैं।
*महिला सांसद भी बैरिकेड्स पर चढ़ गईं*
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा, सुष्मिता देव और कांग्रेस की संजना जाटव, ज्योतिमणि परिवहन भवन में बैरिकेड्स पर चढ़ गईं और पुलिस की ओर से आगे बढ़ने से रोके जाने पर चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगाने लगीं। प्रदर्शनकारी सांसदों के सामने एक बैनर पर लिखा था, ‘श्रीमान वोट चोरी=लोकतंत्र की हत्या।
*राहुल गांधी ने कुछ गंभीर सवाल उठाए‘*
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, ‘मेरे लिए यह मुद्दा बहुत सीधा है। राहुल गांधी ने कुछ गंभीर सवाल उठाए हैं। ये गंभीर जवाबों के हकदार हैं। चुनाव आयोग की न केवल देश के प्रति, बल्कि अपनी ओर से भी जिम्मेदारी है कि जनता के मन में हमारे चुनावों की विश्वसनीयता को लेकर कोई संदेह न रहे। चुनाव पूरे देश के लिए मायने रखते हैं। हमारा लोकतंत्र इतना अनमोल है कि इसे इस संदेह से खतरे में नहीं डाला जा सकता कि कहीं डुप्लीकेट वोटिंग तो नहीं, कहीं कई पते तो नहीं, या कहीं फर्जी वोट तो नहीं। अगर लोगों के मन में कोई संदेह है, तो उसका समाधान किया जाना चाहिए। इन सवालों के जवाब उपलब्ध हो सकते हैं, लेकिन ये जवाब विश्वसनीय होने चाहिए। मेरा बस यही अनुरोध है कि चुनाव आयोग इन सवालों को लेकर उनका समाधान करे।’
थरूर ने कहा कि जब तक लोगों के मन में चुनावों की निष्पक्षता को लेकर संदेह है, तब तक यह चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रहा है। जब तक ये संदेह दूर हो जाते हैं, तब तक चुनाव आयोग की विश्वसनीयता फिर से हासिल की जा सकती है। चुनाव आयोग का अपना हित इन सवालों का जवाब देने में ही असली रास्ता है।
*चुनाव आयोग’, जो अब ‘चुराओ आयोग’ बन गया*
चुनाव आयोग तक विपक्ष के मार्च पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, ‘चुनाव आयोग को लिखा मेरा पत्र सीधा था। मैंने साफ-साफ लिखा था कि सभी विपक्षी सांसद संसद से चुनाव आयोग तक शांतिपूर्ण मार्च निकालेंगे। सभी सांसद चुनाव आयोग को एसआईआर के बारे में एक दस्तावेज देना चाहते हैं। यही हमारी मांग थी। मैंने कल शाम यह पत्र लिखा था और ‘चुनाव आयोग’, जो अब ‘चुराओ आयोग’ बन गया है, ने मुझे कोई जवाब नहीं दिया। और अब वे कह रहे हैं कि सिर्फ 30 सांसद ही आ सकते हैं। हम चाहते थे कि सभी विपक्षी सांसद सामूहिक रूप से चुनाव आयोग को एक दस्तावेज दें। हमें यहीं रोक दिया गया है। हमें चुनाव आयोग नहीं जाने दिया जा रहा है।
*हिरासत में राहुल-प्रियंका समेत तमाम सांसद*
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि हमने हिम्मत की है। सरकार डरी हुई है। सरकार कायर है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि हकीकत ये है कि वो बात नहीं कर सकते। सच्चाई देश के सामने है। ये लड़ाई राजनीतिक नहीं है। ये लड़ाई संविधान बचाने की है। ये लड़ाई एक व्यक्ति, एक वोट की है। हम एक साफ-सुथरी मतदाता सूची चाहते हैं। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, संजय राउत और सागरिका घोष सहित विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के सांसदों को हिरासत में ले लिया है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

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विपक्ष के मार्च में बवाल: हिरासत में लिए गए राहुल-प्रियंका समेत कई सांसद

पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे सांसदों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब सांसदों ने सड़क से हटने से इनकार किया तो राहुल-प्रियंका गांधी समेत तमाम नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। 

नई दिल्ली, 11 अगस्त  2025  (यूटीएन)। बिहार में मतदाता सूची संशोधन के विरोध में विपक्षी सांसदों ने संसद भवन से चुनाव आयोग कार्यालय तक विरोध मार्च शुरू किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी विपक्षी सांसदों को रोकने के लिए परिवहन भवन में पुलिस बैरिकेड्स लगा दिए। यहां उन्हें चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर आगे बढ़ने से  रोक दिया गया। पुलिस का कहना है कि विपक्षी सांसदों की ओर से इस मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी।
पुलिस की ओर से रोके जाने के बाद अखिलेश यादव, महुआ मोइत्रा समेत कई सांसदों ने बैरिकेड्स पर चढ़ने की कोशिश। कुछ सांसद बैरिकेड्स कूदकर बीच सड़क पर धरने पर बैठ गए। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे सांसदों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब सांसदों ने सड़क से हटने से इनकार किया तो राहुल-प्रियंका गांधी समेत तमाम नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। 
*विपक्ष का मार्च क्यों?*
मल्लिकार्जुन खरगे  और शरद पवार समेत विपक्षी सांसदों ने सोमवार को बिहार में मतदाता सूची संशोधन के विरोध में संसद भवन से चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च निकाला। हालांकि, पुलिस ने उन्हें परिवहन भवन के पास बीच रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस की ओर से सांसदों को आगे बढ़ने से रोके जाने पर कई नेता सड़क पर ही बैठ गए और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया और ‘वोट चोरी’ के आरोपों के विरोध में नारे लगाने लगे। उन्होंने पोस्टर लिए और एसआईआर को वापस लेने की मांग करते हुए नारे लगाए।
‘एसआईआर’ और ‘वोट चोरी’ लिखी हुई लाल क्रॉस वाली सफेद टोपी पहने प्रदर्शनकारी सांसदों ने तख्तियां और बैनर लहराकर एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ नारे लगाए। इससे पहले संसद के मकर द्वार पर विरोध मार्च शुरू करने से पहले उन्होंने राष्ट्रगान गाया। मार्च में शामिल होने वालों में प्रमुख रूप से टीआर बालू (द्रमुक), संजय राउत (शिवसेना-यूबीटी), डेरेक ओब्रायन (टीएमसी), कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव समेत द्रमुक, राजद और वामपंथी दलों जैसे विपक्षी दलों के अन्य सांसद शामिल थे। 
 *पुलिस ने क्यों रोका?*
दरअसल, चुनाव आयोग ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश को पत्र लिखकर दोपहर 12.30 बजे मिलने के लिए बुलाया था। चुनाव आयोग ने उनसे 30 सांसदों के साथ आने को कहा था और आने से पहले उन सांसदों की सूचना देने की बात कही थी। इसी के मद्देनजर पुलिस ने प्रदर्शनकारी सांसदों से कहा कि 30 लोग चुनाव आयोग के दफ्तर तक जा सकते हैं। इसके लिए पैदल या वाहन जैसे विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि, विपक्ष इसके लिए तैयार नहीं हुआ। पुलिस ने यह भी बताया कि मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। इससे पहले पुलिस ने प्रदर्शनकारी सांसदों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए संसद मार्ग पर परिवहन भवन के पास व्यापक व्यवस्था की थी। इस दौरान बैरिकेड्स लगाए गए थे। पुलिस ने सांसदों से आगे न बढ़ने को कहा। इस दौरान लाउडस्पीकर से घोषणा की गई। उन्हें संसद भवन से कुछ ही दूरी पर स्थित चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर बढ़ने से रोका गया।
*पुलिस बैरिकेड के ऊपर से कूद गए अखिलेश*
इस दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पुलिस बैरिकेड के ऊपर से कूद गए। वे बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान मतदाता धोखाधड़ी के आरोपों में विपक्षी गठबंधन के विरोध मार्च के तहत संसद से भारत के चुनाव आयोग तक मार्च कर रहे थे।
उन्हें बीच में ही दिल्ली पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद अखिलेश बैरिकेड के ऊपर से कूद गए और अन्य साथियों के साथ बीच सड़क पर धरने पर बैठ गए।
*’हमें रोकने के लिए पुलिस का इस्तेमाल’*
समाजवादी पार्टी प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि पुलिस विपक्षी सांसदों को भारत के चुनाव आयोग की ओर मार्च करने से रोक रही थी। इस वजह से वे विरोध प्रदर्शन करने के लिए बैठ गए। उन्होंने सरकार पर निशाना साधा और कहा कि वे हमें रोकने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रहे हैं।
*महिला सांसद भी बैरिकेड्स पर चढ़ गईं*
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा, सुष्मिता देव और कांग्रेस की संजना जाटव, ज्योतिमणि परिवहन भवन में बैरिकेड्स पर चढ़ गईं और पुलिस की ओर से आगे बढ़ने से रोके जाने पर चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगाने लगीं। प्रदर्शनकारी सांसदों के सामने एक बैनर पर लिखा था, ‘श्रीमान वोट चोरी=लोकतंत्र की हत्या।
*राहुल गांधी ने कुछ गंभीर सवाल उठाए‘*
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, ‘मेरे लिए यह मुद्दा बहुत सीधा है। राहुल गांधी ने कुछ गंभीर सवाल उठाए हैं। ये गंभीर जवाबों के हकदार हैं। चुनाव आयोग की न केवल देश के प्रति, बल्कि अपनी ओर से भी जिम्मेदारी है कि जनता के मन में हमारे चुनावों की विश्वसनीयता को लेकर कोई संदेह न रहे। चुनाव पूरे देश के लिए मायने रखते हैं। हमारा लोकतंत्र इतना अनमोल है कि इसे इस संदेह से खतरे में नहीं डाला जा सकता कि कहीं डुप्लीकेट वोटिंग तो नहीं, कहीं कई पते तो नहीं, या कहीं फर्जी वोट तो नहीं। अगर लोगों के मन में कोई संदेह है, तो उसका समाधान किया जाना चाहिए। इन सवालों के जवाब उपलब्ध हो सकते हैं, लेकिन ये जवाब विश्वसनीय होने चाहिए। मेरा बस यही अनुरोध है कि चुनाव आयोग इन सवालों को लेकर उनका समाधान करे।’
थरूर ने कहा कि जब तक लोगों के मन में चुनावों की निष्पक्षता को लेकर संदेह है, तब तक यह चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रहा है। जब तक ये संदेह दूर हो जाते हैं, तब तक चुनाव आयोग की विश्वसनीयता फिर से हासिल की जा सकती है। चुनाव आयोग का अपना हित इन सवालों का जवाब देने में ही असली रास्ता है।
*चुनाव आयोग’, जो अब ‘चुराओ आयोग’ बन गया*
चुनाव आयोग तक विपक्ष के मार्च पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, ‘चुनाव आयोग को लिखा मेरा पत्र सीधा था। मैंने साफ-साफ लिखा था कि सभी विपक्षी सांसद संसद से चुनाव आयोग तक शांतिपूर्ण मार्च निकालेंगे। सभी सांसद चुनाव आयोग को एसआईआर के बारे में एक दस्तावेज देना चाहते हैं। यही हमारी मांग थी। मैंने कल शाम यह पत्र लिखा था और ‘चुनाव आयोग’, जो अब ‘चुराओ आयोग’ बन गया है, ने मुझे कोई जवाब नहीं दिया। और अब वे कह रहे हैं कि सिर्फ 30 सांसद ही आ सकते हैं। हम चाहते थे कि सभी विपक्षी सांसद सामूहिक रूप से चुनाव आयोग को एक दस्तावेज दें। हमें यहीं रोक दिया गया है। हमें चुनाव आयोग नहीं जाने दिया जा रहा है।
*हिरासत में राहुल-प्रियंका समेत तमाम सांसद*
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि हमने हिम्मत की है। सरकार डरी हुई है। सरकार कायर है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि हकीकत ये है कि वो बात नहीं कर सकते। सच्चाई देश के सामने है। ये लड़ाई राजनीतिक नहीं है। ये लड़ाई संविधान बचाने की है। ये लड़ाई एक व्यक्ति, एक वोट की है। हम एक साफ-सुथरी मतदाता सूची चाहते हैं। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, संजय राउत और सागरिका घोष सहित विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के सांसदों को हिरासत में ले लिया है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

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