नई दिल्ली, 02 अगस्त 2025 (यूटीएन)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने की राह पर है और इसलिए अपने आर्थिक हितों को लेकर सतर्क रहने की भी जरूरत है. हाल ही में मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट सामने आई, जिसमें कहा गया कि भारत 2028 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है और इसकी योजना 2035 तक अपनी जीडीपी को दोगुने से अधिक बढ़ाकर 10.6 ट्रिलियन डॉलर करने की है.
*मजबूती से बढ़ रही देश की इकोनॉमी*
आज एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है इसलिए भारत को अपने आर्थिक हितों के प्रति सजग रहना होगा. हमारे किसान, हमारे लघु उद्योग, हमारे युवाओं के लिए रोजगार इनके हित हमारे लिए सर्वोपरि हैं. सरकार इस दिशा में हर संभव प्रयास कर रही है.” देश में महंगाई कंट्रोल में है, निर्यात रिकॉर्ड हाई लेवल पर है, ग्रामीण स्तर पर भी विकास हो रहा है, भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है.
*जीएसटी कलेक्शन में आया सुधार*
वित्त मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में भारत का वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कलेक्शन सालाना आधार पर 7.5 परसेंट बढ़कर 1,95,735 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. इसके साथ ही लगातार सातवें महीने कलेक्शन 1.8 लाख करोड़ रुपये से ऊपर रहा. अप्रैल-जुलाई 2025 में कलेक्शन सालाना आधार पर 10.7 फीसदी बढ़कर 8,18,009 करोड़ रुपये हो गया है.
*काबू में है महंगाई*
देश में महंगाई में कमी आई है, जिसे लोगों को राहत मिली है. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक महंगाई जून 2025 में घटकर 2.10 परसेंट रह गई, जो जनवरी 2019 के बाद से इसका सबसे निचला स्तर है और महंगाई को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक के लगाए गए अनुमान 4 परसेंट के दायरे में है. महंगाई में आई गिरावट मुख्य रूप से खाने-पीने की चीजों जैसे कि सब्जी, अनाज, दालें, दूध, मसाले और चीनी की कीमतें कम होने की वजह से है, जिससे घरेलू खर्च में कमी आने में मदद मिली है.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी सुधार
ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था भी सुधर रही है. जुलाई 2025 के लिए नाबार्ड के ग्रामीण आर्थिक स्थिति और भावना सर्वेक्षण के अनुसार, 76.6 परसेंट ग्रामीण परिवारों ने उपभोग में वृद्धि की सूचना दी, जबकि 39.6 परसेंट ने पिछले साल के मुकाबले आय में वृद्धि का अनुभव किया. जून में ग्रामीण मुद्रास्फीति घटकर 1.72 परसेंट रह गई, जो एक साल पहले के मुकाबले 394 आधार अंकों की तीव्र गिरावट है, जो गैर-शहरी क्षेत्रों में बेहतर सप्लाई और रोजगार बढ़ने का संकेत है. बड़ी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर ने अपनी पहली तिमाही के बाद मैनेजमेंट की बैठक में इस बात का जिक्र किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी सुधार देखने को मिल रहा और शहरों में भी मांग तेजी से बढ़ रही है.
विकास को छोटे शहरों और ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स जैसे माध्यमों से बल मिल रहा है. एचयूवीआर का ग्रामीण व्यवसाय इसके कुल पोर्टफोलियो का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है. RBI ने भी जनवरी 2025 में रेपो रेट को 6.5 परसेंट से घटाकर 5.5 परसेंट कर दिया है, जिससे उधार देने की लागत को कम करने में मदद मिली है और महंगाई के दबाव के बिना उपभोग और निवेश दोनों को बढ़ावा मिला है.
*निर्यात में आया उछाल*
वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) में भारत का निर्यात बढ़कर 210.31 अरब डॉलर हो गया, जो साल-दर-साल 5.94 परसेंट की बढ़त को दर्शाता है, जबकि आयात में 4.38 परसेंट का उछाल आया है. इससे व्यापार घाटा 9.4 परसेंट कम होकर 20.31 अरब डॉलर रह गया है. सेवाओं का निर्यात भी 10.93 परसेंट बढ़कर 98.13 अरब डॉलर हो गया, जबकि गैर-पेट्रोलियम निर्यात में 5.98 परसेंट और गैर-रत्न एवं आभूषण निर्यात में 7.23 परसेंट की वृद्धि हुई, जो निर्यात की सभी कैटेगरी में व्यापक मजबूती का संकेत है.
इलेक्ट्रॉनिक सामान, चाय, मांस, डेयरी, पोल्ट्री, जूट निर्माण और अनाज जैसे सेगमेंट में निर्यात को बढ़ावा मिला है. सरकार की तमाम नीतियों की वजह से निर्यात को बढ़ावा मिला है. ‘मेक इन इंडिया’ पहल से इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को बढ़ावा मिला, जबकि दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन ने आयात पर निर्भरता को कम करने में मदद की.
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।