नई दिल्ली, 02 अगस्त 2025 (यूटीएन)। फोर्टिस हॉस्पीटल शालीमार बाग ने आम जनता को अंगदान के महत्व के बारे में जागरूक बनाने के उद्देश्य से आज वॉकथॉन का आयोजन किया। इस वॉकथॉन को सवेरे 7.00 बजे अस्पताल परिसर से झंडी दिखाकर रवाना किया गया और इस दौरान प्रतिभागियों ने कुल 3.1 किलोमीटर की दूरी तय की। वॉकथॉन में 500 से अघिक लोगों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया जिनमें अस्पताल के स्टाफ, मरीजों, ट्रांसप्लांट लाभान्वितों के अलावा डोनर के परिजन एवं समाज के अन्य सदस्य भी शामिल हुए।

इस आयोजन की सफलता में लायंस क्लब-दिल्ली, आगमन फाउंडेशन, दधीचि देह दान समिति, चरक हार्ट फाउंडेशन और भारत विकास परिषद जैसे कुछ संगठनों ने भाग लिया। इस संयुक्त प्रयास के माध्यम से अंगदान से जीवनदान की संभावनाओं के बारे में जनता को शिक्षित किया गया। डॉ नरेश कुमार गोयल, प्रिंसीपल डायरेक्टर एंड हेड, डिपार्टमेंट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड हार्ट फेलियर प्रोग्राम, फोर्टिस हॉस्पीटल, शालीमार बाग ने कहा, “अंगदान ऐसा सर्वोच्च उपहार है जो कोई भी व्यक्ति मानवता को दे सकता है। प्रत्येक ब्रेन-डेड डोनर द्वारा अंगदान से आठ जिंदगियों को बचाया जा सकता है। इस वॉकथॉन के जरिए, हम जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ अधिकाधिक लोगों को इसके लिए पहल करने और अंगदान का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं।
महिपाल सिंह भनोत, बिजनेस हेड, फोर्टिस हॉस्पीटल, शालीमार बाग ने कहा, “यह वॉकथॉन फोर्टिस शालीमार बाग की सामुदायिक पहुंच और रोगी शिक्षा के प्रति जारी प्रतिबद्धता का हिस्सा है, विशेष रूप से अंगदान से संबंधित महत्वपूर्ण आवश्यकता वाले क्षेत्रों में। अस्पताल इस दिशा में पारदर्शी प्रोग्रामों से जुड़ा रहा है और अंगदान संबंधी प्रयासों के बारे में जनता की समझ और प्रतिभागिता बढ़ाने पर जोर देता रहा है। नोटो के अनुसार, भारत में ऑर्गेन डोनर्स (अंगदान करने वाले लोगों) की भारी कमी है। जब किसी मरीज को ब्रेन डेड घोषित किया जाता है, तो अस्पतालों को मृतक के परिजनों को अंगदान करने के बारे में परामर्श देने की मंजूरी दी गई है।
इस संबंध में, नोटो के निर्धारित मापदंडों और मार्गदर्शी निर्देशों के मुताबिक, इलाज करने वाला अस्पताल ही संभावित अंगदान करने के बाद सभी जरूरी सूचनाओं तथा आवश्यक मंजूरियों को जुटाने के लिए जिम्मेदार होता है। इस मामले में, मेडिको-लीगल केस के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र लिया गया, और समय पर सुगम तरीके से अंगदान को संभव बनाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर का अनुरोध किया गया। उल्लेखनीय है कि इस विषय में, जागरूकता के अभाव में, गलतफहमियों और प्रक्रियागत देरी की वजह से अंतर बढ़ जाता है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।