नई दिल्ली, 31 दिसंबर (यूटीएन)। वर्ष 2025 भारत के आंतरिक सुरक्षा के इतिहास में एक दुर्लभक्षण के रूप में दर्ज होग। भारत ने हिंसा का मुकाबला सिर्फ सीमाओं पर नहीं किया, बल्कि उसकी जड़ों तक जाकर निर्णायक लड़ाई लड़ी। कई दशकों में पहली बार भारत ने अपने सबसे बड़े आंतरिक खतरे से प्रभावी ढंग से निपटते हुए वामपंथी उग्रवाद की सशस्त्र गतिविधियों पर निर्णायक चोट की। दशकों तक वामपंथी उग्रवाद ने राज्य की क्षमता को कमजोर किया, जन-जीवन को संकट में डाला और संवेदनशील क्षेत्रों में विकास को बाधित किया।
इसके बावजूद भारत ने यह सिद्ध कर दिया कि स्थायी राजनीतिक संकल्प और संस्थागत समन्वय के माध्यम से चिरस्थायी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। वर्ष 2025 में भारत ने छिट-पुट कार्रवाइयों से आगे बढ़कर समग्र आंतरिक सुरक्षा रणनीति अपनाई- सशस्त्र माओवादी तत्वों के विरुद्ध सटीक अभियान और साथ ही लंबे समय से उपेक्षित क्षेत्रों में शासन, अवसंरचना और पुनर्वास का विस्तार। इसके परिणाम स्पष्ट रहे; विद्रोही गतिविधियों का भौगोलिक दायरा संकुचित हुआ, उग्रवादी नेतृत्व संरचनाएं ध्वस्त हुईं और बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण हुए।

*नक्सलवाद की रीढ़ पर वार*
2025 के अंत के साथ ही मोदी सरकार का यह ऐलान केंद्र में बना हुआ है कि 31 मार्च 2026 तक देश को पूरी तरह नक्सलमुक्त कर दिया जाएगा। अब जब लक्ष्य तक पहुँचने में तीन महीने से थोड़ा ही अधिक समय बचा है और सीपीआई (माओवादी) का संगठनात्मक ढांचा काफी हद तक टूट चुका है, तो यह लक्ष्य हासिल किया जा सकने वाला दिखाई देता है। वर्ष 2013 में 182 जिले वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित थे, जबकि अब 2025 में प्रभावित जिलों की संख्या केवल 11 रह गई है। नक्सल मुक्त भारत बनाने के मोदी सरकार के विजन की दिशा में एक बड़े कदम के तहत, नक्सलवाद से सबसे अधिक प्रभावित जिलों की संख्या 6 से घटाकर 3 पर ला दी गई है।
*नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई और प्रमुख मुठभेड़*
अकेले साल 2025 में ही, सुरक्षा बलों ने 335 नक्सलों को निष्क्रिय किया, 2167 से अधिक आत्मसमर्पण कराए और 942 गिरफ्तारियाँ कीं। ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट के तहत 27 कट्टर नक्सलों को निष्क्रिय किया गया। 24 मई 2025 को बीजापुर में 24 कट्टर नक्सलों ने आत्मसमर्पण किया। नवंबर 2025 में, आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मारेडुमिल्ली वन क्षेत्र में सुरक्षा बलों और नक्सलों के बीच हुई मुठभेड़ में 6 माओवादी मारे गए। मृतकों में वरिष्ठ माओवादी नेता और केंद्रीय समिति के सदस्य मड़वी हिड़मा, उनकी पत्नी राजे तथा उनके कई करीबी अनुयायी शामिल थे।
वह साल 2010 के दांतेवाड़ा हमले, साल 2013 के झीरम घाटी नरसंहार और साल 2021 के सुकमा बीजापुर मुठभेड़ में शामिल था। सितंबर 2025 में महाराष्ट्र छत्तीसगढ़ सीमा से सटे अबूझमाड़ क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई, जहाँ सुरक्षा बलों ने केंद्रीय समिति के वरिष्ठ नेताओं कट्टा रामचंद्र रेड्डी और कादरी सत्यानारायण रेड्डी को मार गिराया। मई 2025 में छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में किए गए एक ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने 27 कुख्यात माओवादियों को निष्क्रिय किया, जिनमें सीपीआई-माओवादी का महासचिव, शीर्षतम नेता तथा नक्सल आंदोलन की रीढ़ माना जाने वाले नंबाला केशव राव उर्फ बासवराजू भी शामिल था।
*बड़े-बड़े माओवादी नेताओं का आत्मसमर्पण एवं नेतृत्व संरचना का पतन*
हाल ही में दिसंबर 2025 में मिली एक बड़ी सफलता के तहत, कान्हा-भोरमदेव (केबी) डिवीजन के 10 माओवादियों ने बालाघाट में सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण किया, जिनमें 77 लाख रुपये का इनामी, मोस्ट वांटेड कमांडर सुरेंद्र उर्फ़ कबीर भी शामिल था। वरिष्ठ माओवादी नेता विकास नागपुरे उर्फ नवज्योत उर्फ अनंत ने पिछले माह नवंबर में आत्मसमर्पण किया था और हथियार छोड़ने की सार्वजनिक अपील की थी। साथ ही, नवंबर 2025 में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के 15 सक्रिय कैडरों ने, जिन पर कुल मिलाकर लगभग 50 लाख रुपये का इनाम था, हथियार डाल दिए।
इनमें कुख्यात पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी बटालियन संख्या 1 के चार कट्टर सदस्य भी शामिल थे-पीपीसीएम मड़वी सन्ना, सोड़ी हिडमे, सूर्य उर्फ रव्वा सोमा तथा मीना उर्फ मड़वी भीमे जिनमें से प्रत्येक पर आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था। 14 से 17 अक्टूबर 2025 के बीच, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में कुल 258 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़-उत्तर बस्तर क्षेत्र के 170 तथा महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के 61 शामिल थे। इनमे कई वरिष्ठ कैडर और क्षेत्र कमांडर भी थे, जिनके ऊपर बड़े बड़े इनाम थे।
आत्मसमर्पण सूची में 10 वरिष्ठ माओवादी ऑपरेटिव शामिल हैं:-
सतीश उर्फ टी. वासुदेव राव (केंद्रीय समिति का सदस्य); उल्लेखनीय रूप से, टी. वासुदेव राव पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था, जो इस आत्मसमर्पण की लहर के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करता है। रानिता (दक्षिणी जोनल समिति की सदस्य एवं सचिव, माड़ डीवीसी), भास्कर (डीवीसी सदस्य, पीएल 32), नीला उर्फ नांडे (डीवीसी सदस्य, प्रभारी एवं सचिव, नेलनार क्षेत्र समिति) दीपक पालो (डीवीसी सदस्य, प्रभारी एवं सचिव, इंद्रावती क्षेत्र समिति) सितंबर 2025 में वरिष्ठ माओवादी नेता सुजाता ने 43 वर्षों तक अंडरग्राउंड रहने के बाद आत्मसमर्पण किया। अप्रैल 2025 में सुकमा जिले का बड़ेसट्टी गाँव बस्तर संभाग की पहली ऐसी ग्राम पंचायत घोषित किया गया, जो पूर्णतः नक्सल-मुक्त है।
*विकास के लाभ आखिरकार जनता तक पहुँच रहे हैं*
नक्सलों के खिलाफ तीव्र कार्रवाई के बाद, विकास के फ़ायदे आखिरकार जनता तक पहुँच रहे हैं। उदाहरण के लिए, मई 2025 में छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित चौकी मोला-मनपुर-अम्बागढ़ जिले के 17 दूरस्थ गाँवों को स्वतंत्रता के बाद पहली बार ग्रिड बिजली प्राप्त हुई, जिससे 540 परिवार लाभान्वित हुए। मई 2025 में, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के नक्सल प्रभावित आदिवासी गाँव कतेजहरी ने स्वतंत्रता के बाद पहली बार बस परिवहन सुविधा प्राप्त की और गाँव के निवासियों ने बस के आगमन का जश्न मनाया। बिहार के जमुई जिले के छोटे से गाँव, चोरमारा ने 25 वर्षों में पहली बार 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में शांतिपूर्ण मतदान किया। मोदी सरकार ने एक ऐसी जीत हासिल की है जिसे पीढ़ियाँ याद रखेंगी। लगभग चार दशकों तक बस्तर नक्सलवाद के साये में रहा।
आज 2025 में, यह क्षेत्र रूपांतरित हो रहा है। बस्तर की सामान्य स्थिति और विकास के कारण जगरगुंडा में इंडियन ओवरसीज बैंक की एक शाखा स्थापित की गई है। जगरगुंडा एक दूरस्थ और ऐतिहासिक रूप से अस्थिर क्षेत्र है, जिसने दशकों तक सशस्त्र विद्रोह का सामना किया है। बस्तर में 300 किलोमीटर से अधिक सड़कें बनाई जा रही हैं, वीरान बाजार फिर से जीवंत हो रहे हैं, और चरमपंथियों द्वारा बंद कर दिए गए स्कूल फिर से खुल गए हैं, जिनमें अकेले सुकमा में ही 50 से अधिक प्राथमिक स्कूलों को पुनर्जीवित किया गया और 7 नए स्कूल स्थापित किए गए हैं।
पुनर्वास इस सफलता का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा। नवंबर 2025 में, छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर क्षेत्र के जगदलपुर स्थित संभागीय मुख्यालय में एक विशिष्ट ‘पांडुम कैफे’ का उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व माओवादियों को रोजगार के अवसर प्रदान करना है। यह कैफे पूर्व नक्सलियों द्वारा संचालित किया जा रहा है। दिसंबर 2025 में छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के कोंडापल्ली गाँव में स्वतंत्रता के बाद पहली बार मोबाइल टॉवर स्थापित किया गया। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जो लंबे समय से बाहरी दुनिया से कटा हुआ था।
*निष्कर्ष*
साल 2025 में नक्सलवाद के खिलाफ हासिल की गई उपलब्धियाँ केवल सुरक्षा या कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में हासिल की गई सफलताओं से कहीं अधिक हैं।
सशस्त्र कैडरों का निष्क्रिय होना, नेतृत्व नेटवर्क का उखड़ना और बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण केवल आंकड़े नहीं हैं; ये उस विद्रोही पारिस्थितिकी तंत्र का क्रमिक और सुव्यवस्थित क्षरण दर्शाते हैं, जिसने दशकों तक हिंसा को जीवित रखा। 2025 वह वर्ष माना जाएगा जब भारत ने अपनी सबसे लंबे समय तक चली आंतरिक सुरक्षा चुनौती पर निर्णायक रूप से विराम लगाया, और नक्सल-मुक्त भारत के लक्ष्य की ओर ठोस और अपरिवर्तय प्रगति की।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


