Sunday, August 31, 2025

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मुकदमेबाजी के बोझ को कम करने के लिए कानूनी सहायता, मध्यस्थता की जरूरत: चीफ़ जस्टिस

प्रधान न्यायाधीश ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन' (एससीबीए) द्वारा आयोजित ‘‘सभी के लिए न्याय-कानूनी सहायता और मध्यस्थता बार और पीठ की सहयोगात्मक भूमिका'' व्याख्यान के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए.

नई दिल्ली, 25 अगस्त 2025 (यूटीएन)। प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा कि कानूनी सहायता तथा मध्यस्थता के माध्यम से प्रत्येक नागरिक के लिए न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है. प्रधान न्यायाधीश ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन’ (एससीबीए) द्वारा आयोजित ‘‘सभी के लिए न्याय-कानूनी सहायता और मध्यस्थता बार और पीठ की सहयोगात्मक भूमिका” व्याख्यान के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए. अपने संबोधित में उन्होंने कहा कि हाशिये पर पड़े समुदायों के लिए न्याय का मार्ग जटिल और बाधाओं से भरा हो सकता है.
उन्होंने कहा, ‘‘तेजी से बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ते मुकदमों के बोझ वाले देश में, पारंपरिक मुकदमेबाजी अकेले बोझ नहीं उठा सकती. मध्यस्थता एक ऐसा रास्ता पेश करती है, जो विरोधात्मक नहीं है. यह पक्षों को सहयोगात्मक तरीके से समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित करती है. मैं वरिष्ठ अधिवक्ताओं को प्रोत्साहित करूंगा कि वे पक्षों का मध्यस्थता के माध्यम से अपने विवादों को सुलझाने के लिए सक्रिय रूप से मार्गदर्शन करें.
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अदालती मुकदमेबाजी और मध्यस्थता दोनों में अक्सर लंबी प्रक्रियाएं, जटिल औपचारिकताएं और महत्वपूर्ण वित्तीय व्यय शामिल होते हैं. न्यायमूर्ति गवई ने कहा, ‘‘कानूनी सहायता और मध्यस्थता वे साधन हैं, जिनके माध्यम से हम संविधान के आदर्शों को लोगों के लिए वास्तविकता में बदल सकते हैं. आज जैसे व्याख्यान न्यायाधीशों को याद दिलाते हैं कि सहानुभूति, पहुंच और सुगम्यता वैकल्पिक गुण नहीं, बल्कि न्यायिक सेवा के आवश्यक घटक हैं.
*”रातोंरात खत्म किए जा सकते हैं केस“*
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, मध्यस्थता में कोई हारा नहीं है क्योंकि दोनों पक्षों को न्याय मिला है. अगर बार और बेंच, दोनों मध्यस्थता और कानूनी सहायता प्रक्रिया में भूमिका निभाएं, तो यह इस विषय में एक बड़ी शुरुआत होगी. आज देश में 5.36 करोड़ मामले लंबित हैं.
अगर इस देश में मध्यस्थता सफल हो जाती है, तो इससे देश में लंबित मामलों की संख्या में रातोंरात भारी कमी आ जाएगी. इससे व्यवस्था में रुकावटें दूर होंगी और देश के लोगों को न्याय मिलेगा.
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

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मुकदमेबाजी के बोझ को कम करने के लिए कानूनी सहायता, मध्यस्थता की जरूरत: चीफ़ जस्टिस

प्रधान न्यायाधीश ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन' (एससीबीए) द्वारा आयोजित ‘‘सभी के लिए न्याय-कानूनी सहायता और मध्यस्थता बार और पीठ की सहयोगात्मक भूमिका'' व्याख्यान के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए.

नई दिल्ली, 25 अगस्त 2025 (यूटीएन)। प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा कि कानूनी सहायता तथा मध्यस्थता के माध्यम से प्रत्येक नागरिक के लिए न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है. प्रधान न्यायाधीश ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन’ (एससीबीए) द्वारा आयोजित ‘‘सभी के लिए न्याय-कानूनी सहायता और मध्यस्थता बार और पीठ की सहयोगात्मक भूमिका” व्याख्यान के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए. अपने संबोधित में उन्होंने कहा कि हाशिये पर पड़े समुदायों के लिए न्याय का मार्ग जटिल और बाधाओं से भरा हो सकता है.
उन्होंने कहा, ‘‘तेजी से बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ते मुकदमों के बोझ वाले देश में, पारंपरिक मुकदमेबाजी अकेले बोझ नहीं उठा सकती. मध्यस्थता एक ऐसा रास्ता पेश करती है, जो विरोधात्मक नहीं है. यह पक्षों को सहयोगात्मक तरीके से समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित करती है. मैं वरिष्ठ अधिवक्ताओं को प्रोत्साहित करूंगा कि वे पक्षों का मध्यस्थता के माध्यम से अपने विवादों को सुलझाने के लिए सक्रिय रूप से मार्गदर्शन करें.
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अदालती मुकदमेबाजी और मध्यस्थता दोनों में अक्सर लंबी प्रक्रियाएं, जटिल औपचारिकताएं और महत्वपूर्ण वित्तीय व्यय शामिल होते हैं. न्यायमूर्ति गवई ने कहा, ‘‘कानूनी सहायता और मध्यस्थता वे साधन हैं, जिनके माध्यम से हम संविधान के आदर्शों को लोगों के लिए वास्तविकता में बदल सकते हैं. आज जैसे व्याख्यान न्यायाधीशों को याद दिलाते हैं कि सहानुभूति, पहुंच और सुगम्यता वैकल्पिक गुण नहीं, बल्कि न्यायिक सेवा के आवश्यक घटक हैं.
*”रातोंरात खत्म किए जा सकते हैं केस“*
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, मध्यस्थता में कोई हारा नहीं है क्योंकि दोनों पक्षों को न्याय मिला है. अगर बार और बेंच, दोनों मध्यस्थता और कानूनी सहायता प्रक्रिया में भूमिका निभाएं, तो यह इस विषय में एक बड़ी शुरुआत होगी. आज देश में 5.36 करोड़ मामले लंबित हैं.
अगर इस देश में मध्यस्थता सफल हो जाती है, तो इससे देश में लंबित मामलों की संख्या में रातोंरात भारी कमी आ जाएगी. इससे व्यवस्था में रुकावटें दूर होंगी और देश के लोगों को न्याय मिलेगा.
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

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