Sunday, August 31, 2025

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कुछ प्रोडक्ट्स पर 50% तक टैरिफ के साथ अमेरिका पर जवाबी टैरिफ लगाने की तैयारी में भारत

भारत में 140 करोड़ से ज्यादा लोग रहते हैं और मिडिल क्लास परिवारों की ताकत लगातार बढ़ रही है, देश की ग्रॉस नेशनल इनकम पर कैपिटा  करीब 11,000 डॉलर है, भारत दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है।

नई दिल्ली, 17 अगस्त  2025  (यूटीएन)। पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और भारत के रिश्तों में खटास बढ़ गई है। वजह- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ और पेनाल्टी। पहले उन्होंने 25% टैरिफ लगाया और फिर रूस से तेल खरीदने पर 25% की अतिरिक्त पेनाल्टी का ऐलान कर दिया, जो कुल मिलाकर 50 प्रतिशत हो गया है। और यह 27 अगस्त से पूर्ण रूप से लागू हो सकता है। अमेरिका का यह दोहरा रवैया उसके सबसे भरोसेमंद साझेदार भारत को नाराज़ कर रहा है। हालांकि, टैरिफ का यह खेल इकतरफा नहीं है। भारत के पास भी ऐसे कई लीवरेज हैं, जिनकी मदद से वह अमेरिका को पटखनी दे सकता है।
भारत, अमेरिका पर जवाबी टैरिफ  लगा सकता है, जैसा उसने 2019 में स्टील और एल्यूमीनियम पर शुल्क के जवाब में 28 अमेरिकी सामानों पर टैरिफ लगाकर किया था। इससे अमेरिका के बादाम, सेब, मशीनरी जैसे निर्यात को चोट पहुंचेगी। खास तब, जब अमेरिका ने इंडियन स्टील, एल्युमिनियम समेत दूसरे प्रोडक्ट्स पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। इसके जवाब में भारत चुनिंदा अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर 50% तक टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है। इसके अलावा भारत अपने डेटा नियम सख्त कर सकता है, जिससे गूगल, फेसबुक जैसी कंपनियों को भारत में दिक्कत होगी।
*दुनिया का सबसे बड़ा, तेजी से बढ़ता बाजार*
भारत में 140 करोड़ से ज्यादा लोग रहते हैं और मिडिल क्लास परिवारों की ताकत लगातार बढ़ रही है। देश की ग्रॉस नेशनल इनकम पर कैपिटा  करीब 11,000 डॉलर है। भारत दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है।
एक अनुमान के मुताबिक, साल 2075 तक भारत अमेरिका के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा। खास बात यह है कि अमेरिका की बड़ी कंपनियां (गूगल, अमेजन, एप्पल) भारत को सबसे बड़ा बाजार मानती हैं। अगर भारत इनसे मुंह मोड़ लेता है तो अमेरिकी कंपनियों की जेब पर भारी चोट लगेगी।
*टैलेंट और आईटी का पावरहाउस है भारत*
भारत आईटी का पावरहाउस है। बेंगलुरु, हैदराबाद, दिल्ली-एनसीआर, पुणे और चेन्नई जैसे शहरों समेत देशभर से अमेरिकी कंपनियों को सस्ते और टैलेंटेड लोग मिल जाते हैं। अमेरिका में 45 लाख से ज्यादा भारतीय मूल के लोग हैं, जो वहां की इकोनॉमी और सियासत में बड़ा रोल निभाते हैं। कई भारतीय तो अमेरिका की बड़ी आईटी कंपनियों के बॉस भी हैं। जिनमें गूगल सीईओ सुंदर पिचई जैसे नाम शामिल हैं।
*डिफेंस सेक्टर और हथियारों की डिमांड*
भारत-अमेरिका के बीच हथियारों के सौदे (जैसे- बोइंग, लॉकहीड मार्टिन और जॉइंट मिलिट्री ड्रिल्स) पिछले कुछ सालों में बढ़े हैं। भारत के एविएशन सेक्टर में बोइंग, लॉकहीड मार्टिन, नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन जैसे अमेरिकी दिग्गजों के विमान और टेक्नोलॉजी की मांग ज़ोरों पर है। अगर भारत फ्रांस या रूस की तरफ जाए, तो अमेरिकी हथियार कंपनियों को झटका लग सकता है। खासकर तब, जब भारत ने साल 2025 में अब तक एयरक्राफ्ट और एयरोस्पेस उपकरण में 8.5 बिलियन डॉलर से ज्यादा का आयात किया है।
*दवाइयां, सप्लाई चेन और मेडिकल इक्विपमेंट*
भारत जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है। अमेरिका को सस्ती दवाएं भारत से ही मिलती हैं। टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में भी भारत की सप्लाई चेन अमेरिका के लिए जरूरी है। इसके अलावा, अमेरिका की जॉनसन एंड जॉनसन, फाइज़र, मेडट्रॉनिक जैसी कंपनियां भारत को डायग्नॉस्टिक डिवाइस, सर्जिकल इक्विपमेंट और लाइफ-सेविंग ड्रग्स सप्लाई करती हैं।
हेल्थकेयर सेक्टर में ये आयात अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर्स के लिए जरूरी हैं। भारत इस साल अब तक मेडिकल इक्विपमेंट और फार्मास्यूटिकल्स पर 5.7 बिलियन डॉलर का आयात कर चुका है।
*तेल और गैस में भारत के पास ऑप्शन्स*
भारत अमेरिका से तेल और गैस खरीदता है। साल 2024-25 में एलएनजी आयात 2.46 बिलियन डॉलर रहा। लेकिन भारत के पास मिडिल ईस्ट और अफ्रीका जैसे कई ऑप्शन्स हैं। अगर भारत अमेरिकी तेल कम खरीदे, तो उनकी ऊर्जा कंपनियों को नुकसान होना तय है।
*दुनिया में ऊंचा होता भारत का कद*
दुनिया में भारत का कद लगातार ऊंचा हो रहा है। जी 20, ब्रीक्स, संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर भारत की आवाज मजबूत हो रही है। अमेरिका को जलवायु, आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भारत का साथ चाहिए। भारत ने ट्रंप टैरिफ को ‘गलत’ बताकर और रूस के साथ यूरोप-अमेरिका के व्यापार पर सवाल उठाकर अपनी ताकत दिखाई है।
*आत्मनिर्भरता और भारत के नए दोस्त*
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत के जरिए भारत अमेरिका पर निर्भरता कम कर सकता है। ठीक वैसे, जैसे चीन अपनी जरूरत का सामान खुद बनाता है। यूरोप, एशिया, अफ्रीका के साथ व्यापार बढ़ाकर भारत अमेरिका को पीछे छोड़ सकता है।
*चीन के खिलाफ बेस्ट पार्टनर*
भारत का चीन से सीमा विवाद और टक्कर इसे अमेरिका का नेचुरल दोस्त बनाता है। भारत को खोना यानी चीन को फायदा देना, जो अमेरिका कभी नहीं चाहेगा। अगर भारत ब्रीक्स में रूस-चीन के साथ और करीब जाए, तो अमेरिका की मुश्किल बढ़ सकती है। 
*स्ट्रेटैजिक स्ट्रेंथ और भारत की पोजीशन*
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की पोजीशन और क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) में उसकी भूमिका चीन को काउंटर करने के लिए अमेरिका को चाहिए। भारत के बिना अमेरिका की ये रणनीति कमजोर पड़ सकती है।
*भारत अमेरिका में हुआ 11 लाख करोड़ का व्यापार*
यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रीप्रेज़ेंटेटिव के डेटा के मुताबिक, साल 2024 में भारत और अमेरिका के बीच कुल 11 लाख करोड़ रुपए का व्यापार हुआ। अमेरिका से भारत में 3.46 लाख करोड़ रुपए का निर्यात हुआ। जिसमें कच्चा तेल, पेट्रोलियम, कोयला, हीरे एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट के पुर्जे शामिल हैं। वहीं भारत ने अमेरिका को 7.35 लाख करोड़ रुपए का निर्यात किया। निर्यात किए गए सामान में फार्मास्यूटिकल्स, टेलीकॉम डिवाइस, ज्वैलरी, पेट्रोलियम और कपड़े शामिल हैं।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

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कुछ प्रोडक्ट्स पर 50% तक टैरिफ के साथ अमेरिका पर जवाबी टैरिफ लगाने की तैयारी में भारत

भारत में 140 करोड़ से ज्यादा लोग रहते हैं और मिडिल क्लास परिवारों की ताकत लगातार बढ़ रही है, देश की ग्रॉस नेशनल इनकम पर कैपिटा  करीब 11,000 डॉलर है, भारत दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है।

नई दिल्ली, 17 अगस्त  2025  (यूटीएन)। पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और भारत के रिश्तों में खटास बढ़ गई है। वजह- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ और पेनाल्टी। पहले उन्होंने 25% टैरिफ लगाया और फिर रूस से तेल खरीदने पर 25% की अतिरिक्त पेनाल्टी का ऐलान कर दिया, जो कुल मिलाकर 50 प्रतिशत हो गया है। और यह 27 अगस्त से पूर्ण रूप से लागू हो सकता है। अमेरिका का यह दोहरा रवैया उसके सबसे भरोसेमंद साझेदार भारत को नाराज़ कर रहा है। हालांकि, टैरिफ का यह खेल इकतरफा नहीं है। भारत के पास भी ऐसे कई लीवरेज हैं, जिनकी मदद से वह अमेरिका को पटखनी दे सकता है।
भारत, अमेरिका पर जवाबी टैरिफ  लगा सकता है, जैसा उसने 2019 में स्टील और एल्यूमीनियम पर शुल्क के जवाब में 28 अमेरिकी सामानों पर टैरिफ लगाकर किया था। इससे अमेरिका के बादाम, सेब, मशीनरी जैसे निर्यात को चोट पहुंचेगी। खास तब, जब अमेरिका ने इंडियन स्टील, एल्युमिनियम समेत दूसरे प्रोडक्ट्स पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। इसके जवाब में भारत चुनिंदा अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर 50% तक टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है। इसके अलावा भारत अपने डेटा नियम सख्त कर सकता है, जिससे गूगल, फेसबुक जैसी कंपनियों को भारत में दिक्कत होगी।
*दुनिया का सबसे बड़ा, तेजी से बढ़ता बाजार*
भारत में 140 करोड़ से ज्यादा लोग रहते हैं और मिडिल क्लास परिवारों की ताकत लगातार बढ़ रही है। देश की ग्रॉस नेशनल इनकम पर कैपिटा  करीब 11,000 डॉलर है। भारत दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है।
एक अनुमान के मुताबिक, साल 2075 तक भारत अमेरिका के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा। खास बात यह है कि अमेरिका की बड़ी कंपनियां (गूगल, अमेजन, एप्पल) भारत को सबसे बड़ा बाजार मानती हैं। अगर भारत इनसे मुंह मोड़ लेता है तो अमेरिकी कंपनियों की जेब पर भारी चोट लगेगी।
*टैलेंट और आईटी का पावरहाउस है भारत*
भारत आईटी का पावरहाउस है। बेंगलुरु, हैदराबाद, दिल्ली-एनसीआर, पुणे और चेन्नई जैसे शहरों समेत देशभर से अमेरिकी कंपनियों को सस्ते और टैलेंटेड लोग मिल जाते हैं। अमेरिका में 45 लाख से ज्यादा भारतीय मूल के लोग हैं, जो वहां की इकोनॉमी और सियासत में बड़ा रोल निभाते हैं। कई भारतीय तो अमेरिका की बड़ी आईटी कंपनियों के बॉस भी हैं। जिनमें गूगल सीईओ सुंदर पिचई जैसे नाम शामिल हैं।
*डिफेंस सेक्टर और हथियारों की डिमांड*
भारत-अमेरिका के बीच हथियारों के सौदे (जैसे- बोइंग, लॉकहीड मार्टिन और जॉइंट मिलिट्री ड्रिल्स) पिछले कुछ सालों में बढ़े हैं। भारत के एविएशन सेक्टर में बोइंग, लॉकहीड मार्टिन, नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन जैसे अमेरिकी दिग्गजों के विमान और टेक्नोलॉजी की मांग ज़ोरों पर है। अगर भारत फ्रांस या रूस की तरफ जाए, तो अमेरिकी हथियार कंपनियों को झटका लग सकता है। खासकर तब, जब भारत ने साल 2025 में अब तक एयरक्राफ्ट और एयरोस्पेस उपकरण में 8.5 बिलियन डॉलर से ज्यादा का आयात किया है।
*दवाइयां, सप्लाई चेन और मेडिकल इक्विपमेंट*
भारत जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है। अमेरिका को सस्ती दवाएं भारत से ही मिलती हैं। टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में भी भारत की सप्लाई चेन अमेरिका के लिए जरूरी है। इसके अलावा, अमेरिका की जॉनसन एंड जॉनसन, फाइज़र, मेडट्रॉनिक जैसी कंपनियां भारत को डायग्नॉस्टिक डिवाइस, सर्जिकल इक्विपमेंट और लाइफ-सेविंग ड्रग्स सप्लाई करती हैं।
हेल्थकेयर सेक्टर में ये आयात अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर्स के लिए जरूरी हैं। भारत इस साल अब तक मेडिकल इक्विपमेंट और फार्मास्यूटिकल्स पर 5.7 बिलियन डॉलर का आयात कर चुका है।
*तेल और गैस में भारत के पास ऑप्शन्स*
भारत अमेरिका से तेल और गैस खरीदता है। साल 2024-25 में एलएनजी आयात 2.46 बिलियन डॉलर रहा। लेकिन भारत के पास मिडिल ईस्ट और अफ्रीका जैसे कई ऑप्शन्स हैं। अगर भारत अमेरिकी तेल कम खरीदे, तो उनकी ऊर्जा कंपनियों को नुकसान होना तय है।
*दुनिया में ऊंचा होता भारत का कद*
दुनिया में भारत का कद लगातार ऊंचा हो रहा है। जी 20, ब्रीक्स, संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर भारत की आवाज मजबूत हो रही है। अमेरिका को जलवायु, आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भारत का साथ चाहिए। भारत ने ट्रंप टैरिफ को ‘गलत’ बताकर और रूस के साथ यूरोप-अमेरिका के व्यापार पर सवाल उठाकर अपनी ताकत दिखाई है।
*आत्मनिर्भरता और भारत के नए दोस्त*
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत के जरिए भारत अमेरिका पर निर्भरता कम कर सकता है। ठीक वैसे, जैसे चीन अपनी जरूरत का सामान खुद बनाता है। यूरोप, एशिया, अफ्रीका के साथ व्यापार बढ़ाकर भारत अमेरिका को पीछे छोड़ सकता है।
*चीन के खिलाफ बेस्ट पार्टनर*
भारत का चीन से सीमा विवाद और टक्कर इसे अमेरिका का नेचुरल दोस्त बनाता है। भारत को खोना यानी चीन को फायदा देना, जो अमेरिका कभी नहीं चाहेगा। अगर भारत ब्रीक्स में रूस-चीन के साथ और करीब जाए, तो अमेरिका की मुश्किल बढ़ सकती है। 
*स्ट्रेटैजिक स्ट्रेंथ और भारत की पोजीशन*
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की पोजीशन और क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) में उसकी भूमिका चीन को काउंटर करने के लिए अमेरिका को चाहिए। भारत के बिना अमेरिका की ये रणनीति कमजोर पड़ सकती है।
*भारत अमेरिका में हुआ 11 लाख करोड़ का व्यापार*
यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रीप्रेज़ेंटेटिव के डेटा के मुताबिक, साल 2024 में भारत और अमेरिका के बीच कुल 11 लाख करोड़ रुपए का व्यापार हुआ। अमेरिका से भारत में 3.46 लाख करोड़ रुपए का निर्यात हुआ। जिसमें कच्चा तेल, पेट्रोलियम, कोयला, हीरे एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट के पुर्जे शामिल हैं। वहीं भारत ने अमेरिका को 7.35 लाख करोड़ रुपए का निर्यात किया। निर्यात किए गए सामान में फार्मास्यूटिकल्स, टेलीकॉम डिवाइस, ज्वैलरी, पेट्रोलियम और कपड़े शामिल हैं।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

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