Saturday, August 30, 2025

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क्रीमी लेयर’ पर बड़े ऐक्शन की तैयारी में केंद्र सरकार

केंद्र सरकार ओबीसी आरक्षण के तहत क्रीमी लेयर निर्धारित करने के लिए आय की सीमा सभी संस्थाओं के लिए एक समान रखने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।

नई दिल्ली, 13 अगस्त 2025 (यूटीएन)। केंद्र सरकार ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ पाने के लिए क्रीमी लेयर के इनकम की सीमा में एक समानता लाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। मतलब, सभी तरह की सरकारों, सार्वजनिक उपक्रमों, विश्वविद्यालयों या प्राइवेट संस्थानों के लिए ओबीसी की क्रीमी लेयर की आय सीमा एक ही रखने पर मंथन चल रहा है। ऐसा करने का मकसद ये है कि ओबीसी क्रीमी लेयर में यह निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके कि कौन इसके दायरे में आता है और किसे इससे बाहर रखा जाना चाहिए। ऐसा करने से ये होगा कि अलग-अलग संगठनों और संस्थाओं में इस आधार पर भेदभाव नहीं हो सकेगा।
*क्रीमी लेयर की आय सीमा समान*
केंद्र सरकार ओबीसी आरक्षण के तहत क्रीमी लेयर निर्धारित करने के लिए आय की सीमा सभी संस्थाओं के लिए एक समान रखने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। मतलब, ऐसा होने से केंद्र सरकार, राज्य सरकार, पीएसयू, विश्वविद्यालय या अन्य ऐसी संस्थानों के लिए ओबीसी आरक्षण का लाभ प्राप्त करने के लिए क्रीमी लेयर की आय सीमा एक ही रखी जाएगी।
*क्रीमी लेयर का मतलब क्या है?*
ओबीसी आरक्षण में क्रीमी लेयर की शुरुआत 1992 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से हुई थी। यह केस इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ से संबंधित था। क्रीमी लेयर का लक्ष्य यह तय करना था कि ओबीसी में जो सक्षम वर्ग है, उसे आरक्षण के लाभ से दूर रखा जाए, ताकि जरूरतमंदों को इसका पूर्ण लाभ मिल सके। 2017 में केंद्र ने क्रीमी लेयर की सीमा बढ़ाकर 8 लाख रुपये प्रति वर्ष कर दी और अभी भी यह लागू है।
*ओबीसी क्रीमी लेयर में कौन?*
ओबीसी क्रीमी लेयर के दायरे में सरकार के बड़े पदों पर मौजूद अफसर, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, सार्वजनिक उपक्रमों के बड़े अधिकारी, सशस्त्र सेनाओं के अधिकारी, बड़े बिजनेसमैन या जो भी इनकम की निर्धारित सीमा में आते हैं। अब जिस क्रीमी लेयर पर नया प्रस्ताव लाए जाने की रिपोर्ट है, उसे सामाजिक न्याय और अधिकारिता, शिक्षा, पर्सनल एंड ट्रेनिंग, विधि मामले, श्रम और रोजगार, सार्वजनिक उपक्रम मंत्रालयों और नीति आयोग के साथ-साथ राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने आपस में चर्चा के बाद तैयार किया है।
*क्रीमी लेयर में समानता की जरूरत?*
कई केंद्रीय पीएसयू में तो 2017 में तय किया गया क्रीमी लेयर निगम लागू है। लेकिन, कई विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों और राज्य सरकार की इकाइयों में इसमें इसकी आय सीमा अभी भी अलग-अलग है। बता दें कि केंद्र सरकार की नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में एडमिशन के लिए गैर-क्रीमी लेयर ओबीसी को 27% आरक्षण की व्यवस्था है। राज्य सरकारों की नौकरियों में आरक्षण की इस सीमा में अंतर है। ओबीसी के जो लोग क्रीमी लेयर के दायरे में आते हैं, उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलता। लेकिन, क्रीमी लेयर की इनकम की एक समान सीमा निर्धारित नहीं रहने से इस वर्ग को भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर,एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर समेत टीचिंग स्टाफ की सैलरी आमतौर पर लेवल 10 या उससे भी ज्यादा होती है, जो कि सरकार के ग्रुप-ए के पदों के समान या कई बार उससे भी ज्यादा हो जाती है। ऐसे में प्रस्ताव ये भी है कि ऐसे पदों को भी क्रीमी लेयर के दायरे में लाया जाए। अगर ऐसा होता है तो जो नए लोग क्रीमी लेयर के दायरे में आ जाएंगे, उनके बच्चों को ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकेगा।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

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क्रीमी लेयर’ पर बड़े ऐक्शन की तैयारी में केंद्र सरकार

केंद्र सरकार ओबीसी आरक्षण के तहत क्रीमी लेयर निर्धारित करने के लिए आय की सीमा सभी संस्थाओं के लिए एक समान रखने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।

नई दिल्ली, 13 अगस्त 2025 (यूटीएन)। केंद्र सरकार ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ पाने के लिए क्रीमी लेयर के इनकम की सीमा में एक समानता लाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। मतलब, सभी तरह की सरकारों, सार्वजनिक उपक्रमों, विश्वविद्यालयों या प्राइवेट संस्थानों के लिए ओबीसी की क्रीमी लेयर की आय सीमा एक ही रखने पर मंथन चल रहा है। ऐसा करने का मकसद ये है कि ओबीसी क्रीमी लेयर में यह निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके कि कौन इसके दायरे में आता है और किसे इससे बाहर रखा जाना चाहिए। ऐसा करने से ये होगा कि अलग-अलग संगठनों और संस्थाओं में इस आधार पर भेदभाव नहीं हो सकेगा।
*क्रीमी लेयर की आय सीमा समान*
केंद्र सरकार ओबीसी आरक्षण के तहत क्रीमी लेयर निर्धारित करने के लिए आय की सीमा सभी संस्थाओं के लिए एक समान रखने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। मतलब, ऐसा होने से केंद्र सरकार, राज्य सरकार, पीएसयू, विश्वविद्यालय या अन्य ऐसी संस्थानों के लिए ओबीसी आरक्षण का लाभ प्राप्त करने के लिए क्रीमी लेयर की आय सीमा एक ही रखी जाएगी।
*क्रीमी लेयर का मतलब क्या है?*
ओबीसी आरक्षण में क्रीमी लेयर की शुरुआत 1992 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से हुई थी। यह केस इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ से संबंधित था। क्रीमी लेयर का लक्ष्य यह तय करना था कि ओबीसी में जो सक्षम वर्ग है, उसे आरक्षण के लाभ से दूर रखा जाए, ताकि जरूरतमंदों को इसका पूर्ण लाभ मिल सके। 2017 में केंद्र ने क्रीमी लेयर की सीमा बढ़ाकर 8 लाख रुपये प्रति वर्ष कर दी और अभी भी यह लागू है।
*ओबीसी क्रीमी लेयर में कौन?*
ओबीसी क्रीमी लेयर के दायरे में सरकार के बड़े पदों पर मौजूद अफसर, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, सार्वजनिक उपक्रमों के बड़े अधिकारी, सशस्त्र सेनाओं के अधिकारी, बड़े बिजनेसमैन या जो भी इनकम की निर्धारित सीमा में आते हैं। अब जिस क्रीमी लेयर पर नया प्रस्ताव लाए जाने की रिपोर्ट है, उसे सामाजिक न्याय और अधिकारिता, शिक्षा, पर्सनल एंड ट्रेनिंग, विधि मामले, श्रम और रोजगार, सार्वजनिक उपक्रम मंत्रालयों और नीति आयोग के साथ-साथ राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने आपस में चर्चा के बाद तैयार किया है।
*क्रीमी लेयर में समानता की जरूरत?*
कई केंद्रीय पीएसयू में तो 2017 में तय किया गया क्रीमी लेयर निगम लागू है। लेकिन, कई विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों और राज्य सरकार की इकाइयों में इसमें इसकी आय सीमा अभी भी अलग-अलग है। बता दें कि केंद्र सरकार की नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में एडमिशन के लिए गैर-क्रीमी लेयर ओबीसी को 27% आरक्षण की व्यवस्था है। राज्य सरकारों की नौकरियों में आरक्षण की इस सीमा में अंतर है। ओबीसी के जो लोग क्रीमी लेयर के दायरे में आते हैं, उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलता। लेकिन, क्रीमी लेयर की इनकम की एक समान सीमा निर्धारित नहीं रहने से इस वर्ग को भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर,एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर समेत टीचिंग स्टाफ की सैलरी आमतौर पर लेवल 10 या उससे भी ज्यादा होती है, जो कि सरकार के ग्रुप-ए के पदों के समान या कई बार उससे भी ज्यादा हो जाती है। ऐसे में प्रस्ताव ये भी है कि ऐसे पदों को भी क्रीमी लेयर के दायरे में लाया जाए। अगर ऐसा होता है तो जो नए लोग क्रीमी लेयर के दायरे में आ जाएंगे, उनके बच्चों को ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकेगा।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।

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