नई दिल्ली, 28 जुलाई 2025 (यूटीएन)। सोमवार को मॉनसून सत्र के दौरान लोकसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा करते हुए पाकिस्तान की औकात दिखा दी। रक्षा मंत्री ने कहा कि जिस प्रकार प्रभु हनुमान ने लंका में हमले में की योजना बनाई थी, उसी प्रकार हमने योजना बनाई थी। हमने धर्म की रक्षा के लिए सुदर्शन चक्र उठा लिया है। हमारी नीति भगवान राम-कृष्ण से प्रेरित है। हम शांति को शक्ति मानते हैं। शेर अगर मेंढकों को मारे तो यह सही नहीं होता है, हमारे देश की सेना शेर है। प्रीति और बैर बराबर वालों से करना चाहिए।
*हमने सुदर्शन चक्र उठा लिया*
राजनाथ सिंहने कहा, हमने सुदर्शन चक्र उठा लिया है, हमारी प्रवृत्ति भगवान राम और भगवान कृष्ण से प्रेरित है। हमारी सरकार का स्टैंड बिल्कुल साफ है, जिसके मूल में लोकतंत्र का एक कतरा भी न हो, उसके साथ संवाद नहीं हो सकता। गोलियों की आवाज में संवाद की आवाज दब जाती है। पाकिस्तान की नीति और चरित्र को लेकर कोई भ्रम नहीं रहना चाहिए। यह ऐसा देश है, जो वैश्विक आतंकवाद की नर्सरी है।
*शेर अगर मेढकों को मारे तो यह सही नहीं होता*
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि शेर अगर मेढकों को मारे तो यह सही नहीं होता है। हमारे देश की सेना शेर है, जो मुल्क अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहा है तो उस मुल्क से क्या लड़ना है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से हमारा कैसा मुकाबला। भारत ने कभी किसी की जमीन पर कब्जा नहीं किया। आतंक फैलाने वालों के हाथ उखाड़ फेकेंगे।
*हमारी मूल प्रवृत्ति बुद्ध की है युद्ध की नहीं*
राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी परीक्षा के परिणाम में रिजल्ट मैटर करता है। परीक्षा में पेन-पेंसिल टूटने की चिंता नहीं हो। हमारी मूल प्रवृत्ति बुद्ध की है युद्ध की नहीं। लाहौर जाकर हमने दोस्ती का हाथ बढ़ाया। लाहौर जाकर पीएम मोदी ने नवाज शरीफ से दोस्ती का हाथ बढ़ाया था। हम शांति की बात कर रहे थे, वो घुसपैठ कर रहे थे। संप्रभुता को चुनौती देने वाले को जवाब मिलेगा। बातचीत सभ्य देशों के साथ होती है। पाकिस्तान के हालात जगजाहिर हैं।

राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूरी दुनिया ने देखा कैसे पाकिस्तान की सरकार आतंकियों के लिए राजकीय अंतिम संस्कार का इंतजाम कर रही है और सैन्य अधिकारी भी इसमें भाग लेते हैं। पाकिस्तान की सेना और आईएसआई आतंकवाद को प्रॉक्सी वॉर के रूप में इस्तेमाल करती है। ये मोदी का भारत है।
हमारी नीति कभी किसी दूसरे की एक इंच जमीन पर कब्जा करने की नहीं रही है। हमारा पाकिस्तान विरोध उनकी आतंकवाद की नीति के कारण है। हम शांति के लिए हाथ बढ़ाना जानते हैं, तो शांति के लिए हाथ उखाड़ना भी जानते हैं। दुष्ट को उनकी भाषा में समझाना भी जानते हैं।
*रामधारी सिंह दिनकर की सुनाई पंक्ति*
इस दौरान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा रचित पंक्तियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ‘क्षमाशील हो रिपु सक्षम तुम हुए विनीत जितना ही, दुष्ट कौरवों ने तुमको कायर समझा उतना ही।’ इसका मतलब है कि जब कोई व्यक्ति अपने शत्रु के सामने विनम्र होता है, तो दुष्ट शत्रु उसे कायर समझता है। यह पंक्ति महाभारत के प्रसंग से ली गई है, जहां पांडवों ने कौरवों के अत्याचारों को सहन किया और उन्हें बार-बार क्षमा किया, जिसके कारण कौरवों ने उन्हें कायर समझा।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।