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17 वर्ष पूर्व बेची गई जमीन पर नियति हुई खराब,विक्रेता जमीन पर कर रहा कब्ज़ा

संवाददाता मकसूद अहमद सोनभद्र 

मामला पापी ग्राम पंचायत के गांव जोकाही का

सोनभद्र कर्मा थानांतर्गत ग्राम पंचायत पापी के जोकाही गांव में एक व्यक्ति द्वारा 17 वर्ष पूर्व अपनी जमीन एक व्यक्ति को बेची गई, बढ़ती कीमत को देखकर उसकी नियत खराब हो गई , जिसे पुनः अपनी जमीन को कब्जा करने के नियत से विवादित स्थित पैदा करने का कुचक्र किया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पापी गांव निवासी रामराज विश्वकर्मा के पिता स्वर्गीय रामदुलारे द्वारा अपनी आवश्यक आवश्यकता की पूर्ति के लिए 12 विश्वा जमीन खैराही गांव निवासी समसुन निशा पत्नी अतहर अली निवासी खैराहि को 60 हजार रूपये में बेच दी गई। उस समय बैनामा के खर्च से बचने के लिए 50 रूपये के स्टांप पेपर पर गांव के प्रधान एवम अन्य पांच गवाहों के हस्ताक्षर से बेचिनामा लिख दिया गया। विक्रेता के पुत्र रामराज विश्वकर्मा ने स्वयं अपने हस्त लिखित स्टांप पर अपनी भी गवाही किया है। विक्रेता द्वारा उक्त जमीन पर क्रेता को कब्जा भी दे दिया गया। लिखा गया कि क्रेता के पास जब भी पैसे की व्यवस्था हो जाएगी वह रजिस्ट्री करा लेगा। क्रेता उसी तिथि से जमीन पर जोत कोड सुरु कर दिया। माह दिसम्बर वर्ष 2022में जब क्रेता द्वारा खरीदी गई भूमि पर अपना मकान बनाना सुरु किया तो विक्रेता की नियति बदल गईं वह उस जमीन का स्वयं मालिक होने का दावा करते हुए मकान का निर्माण कार्य रुकवा दिया। क्रेता समसुन निशा पत्नी अतहर अली का कहना है कि जब हमने इस जमीन को खरीदा था तब मेरे गांव में जमीन मात्र 50 हजार रूपये बिगहा थी, हमने कर्ज लेकर इस जमीन को रामराज विश्वकर्मा के अनुनय विनय पर ही क्रय किया था, अब इस जमीन की कीमत बढ़ती देख विश्वकर्मा की नियत खराब हो गई है। अब इनके द्वारा यह कहा जा रहा है कि जमीन का बैनामा नहीं कराया गया, खतौनी मेरे नाम है इस लिए मेरी जमीन छोड़ दीजिए, समसुन का कहना है कि इस तरह देखा जाए तो पूरा करकी माइनर कम से कम 60 से अधिक लोगों का मकान इसी तरह बना हुआ है, इतना ही नहीं स्वयं रामराज विश्वकर्मा दुसरे की जमीन पर अपना घर एवम अन्य जमीन पर कब्ज़ा किए हुए हैं। यदि रामराज विश्वकर्मा की तरह अन्य लोगो की भी नियत खराब हुई तो लोगों के पास रहने के लिए घर तक नही बचेगा। क्षेत्रीय संभ्रांत लोगो की माने तो करकी माइनर, पापी, जोकाहि, गांव में अधिकांस लोगों के नाम 12 विश्वा जमीन पट्टे पर दी गई थी, जिसमे 90% लोगों ने अपनी ज़मीन अपनी आवश्यक आवश्यकता के लिए 50/100 रूपये के स्टांप पेपर पर बेचीनामा लिखकर बेच दी गई है। जिसमे 60%से अधिक अनुसूचित जाति के लोगों की जमीन है। अब प्रश्न यह उठता है कि क्या इसी तरह अब सभी लोग महंगी हुई लगभग एक करोड़ की जमीन वापस लेने का दावा पेस करेगें। यदि सबकी नियत डोली तो पांच दर्जन से अधिक घर परिवार बर्बादी के कगार पर पहुंच जायेंगे। पुलिस प्रशासन को बीच का कोई रास्ता निकालना होगा। अन्यथा स्थिति भयावह हो जाएगी। कुछ अराजक तत्व इस मामले को हिंदू मुस्लिम के बीच बताकर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के फिराक में भी लगे हुए हैं। क्षेत्रीय संभ्रांत लोगो ने बताया कि रामराज विश्वकर्मा वेवजह मामले को तुल दे रहे हैं। उनकी नियति खराब होने से अन्य लोगो में भी यह परंपरा सुरु हो जायेगी, बहुत से लोगों का घर परिवार तबाह हो जाएगा। मौके पर पहुंचे लेखापाल संजय सिंह ने बताया कि स्टांप पेपर के बेचीनामा को विधिक मान्यता नहीं है, पैसा के लेन देन का मामला न्यायालय द्वारा ही देखा जायेगा। जब तक न्यायालय का कोई आदेश नहीं होता तब तक निर्माण कार्य स्थगित रखा जाए।

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