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भारत एक ऐसा राष्ट्र है जहां इलाज एक सेवा है आरोग्य एक दान है प्रधानमंत्री

फरीदाबाद, 25 अगस्त 2022 (यूटीएन)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज फरीदाबाद में अत्याधुनिक अमृता अस्पताल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, मुख्यमंत्री मनोहर लाल, उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, माता अमृतानंदमयी भी उपस्थित थे। इस अवसर पर अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ दिन पहले ही देश ने एक नयी ऊर्जा के साथ आजादी के अमृतकाल में प्रवेश किया है। हमारे इस अमृतकाल में देश के सामूहिक प्रयास प्रतिष्ठित हो रहे हैं, देश के सामूहिक विचार जाग्रत हो रहे हैं।
उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए। कहा कि इस अमृत काल की इस प्रथम बेला में देश को माता अमृतानंदमयी के आशीर्वाद का अमृत भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह अस्पताल आधुनिकता और आध्यात्मिकता का मिश्रण है और जरूरतमंद मरीजों के लिए सुलभ और किफायती इलाज का माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा, “अम्मा प्रेम, करुणा, सेवा और त्याग की प्रतिमूर्ति हैं। वह भारत की आध्यात्मिक परंपरा की वाहक हैं। भारत की सेवा और चिकित्सा की महान परंपरा पर ध्यान केंद्रित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत एक ऐसा राष्ट्र है, जहां, इलाज एक सेवा है, आरोग्य एक दान है।
जहां आरोग्य आध्यात्म, दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुये हैं। हमारे यहां आयुर्विज्ञान एक वेद है। हमने हमारी मेडिकल साइन्स को भी आयुर्वेद का नाम दिया है।” उन्होंने सभा को याद दिलाया कि सदियों से गुलामी के कठिन दौर में भी भारत ने अपनी आध्यात्मिक और सेवा विरासत को कभी भी गुमनामी में लुफ्त नहीं होने दिया। उन्होंने राष्ट्र के सौभाग्य के बारे में बताया कि पूज्य अम्मा जैसे संतों के रूप में आध्यात्मिक ऊर्जा हमेशा देश के कोने-कोने में व्याप्त थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे धार्मिक और सामाजिक संस्थानों द्वारा शिक्षा-चिकित्सा से जुड़ी जिम्मेदारियों के निर्वहन की ये व्यवस्था एक तरह से पुराने समय का पीपीपी मॉडल ही है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप तो कहते ही हैं, लेकिन मैं इसे ‘परस्पर प्रयास’ के तौर पर भी देखता हूं।” प्रधानमंत्री ने भारत में बने वैक्सीन के बारे में दुष्प्रचार पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आप सभी को ध्यान होगा कि जब भारत ने अपनी वैक्सीन बनाई थी, तो कुछ लोगों ने किस तरह का दुष्प्रचार करने की कोशिश की थी। इस दुष्प्रचार की वजह से समाज में कई तरह की अफवाहें फैलने लगी थीं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि लेकिन जब समाज के धर्मगुरू, अध्यात्मिक गुरू एक साथ आए, उन्होंने लोगों को अफवाहों पर ध्यान ना देने को कहा।
तो उसका तुरंत असर हुआ। भारत को उस तरह की वैक्सीन हेसिटेंसी का सामना नहीं करना पड़ा, जैसा अन्य देशों में देखने को मिला। लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम अपने संबोधन के बारे में चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बार लाल किले से मैंने अमृतकाल के पंच-प्राणों का एक विजन देश के सामने रखा है। इन पंच प्राणों में से एक है- गुलामी की मानसिकता का संपूर्ण त्याग। उन्होंने कहा कि इसकी इस समय देश में खूब चर्चा भी हो रही है। प्रधानमंत्री ने कहा, “इस मानसिकता का जब हम त्याग करते हैं, तो हमारे कार्यों की दिशा भी बदल जाती है।”
उन्होंने यह भी कहा कि यही बदलाव आज देश के हेल्थ केयर सिस्टम में भी दिखाई दे रहा है, क्योंकि देश के पारंपरिक ज्ञान में विश्वास बढ़ रहा है। योग की आज वैश्विक स्वीकृति है और पूरा विश्व अगले वर्ष अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष मनाएगा।
संबोधन का समापन करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि हरियाणा आज देश के उन अग्रणी राज्यों में है, जहां घर-घर पाइप से पानी की सुविधा से जुड़ चुका है। प्रधानमंत्री ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान में भी उत्कृष्ट योगदान के लिए हरियाणा के लोगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि फिटनेस और खेल जैसे विषय तो हरियाणा के संस्कारों में ही हैं।
अस्‍पताल का निर्माण माता अमृतानंदमयी मठ के अंतर्गत 130 एकड़ के कैंपस में किया गया है अस्पताल के रेजीडेंट मेडिकल निदेशक डा.संजीव के सिंह के अनुसार अम्मा यानी माता अमृतानंदमयी के आशीर्वाद से दो साल बाद अस्पताल में बेड की संख्या बढ़कर 750 और पांच साल में एक हजार बेड की हो जाएगी। इसमें 534 क्रिटिकल केयर बेड भी शामिल होंगे। फिर चरण दर चरण इसमें विस्तार करते हुए 2600 बेड का अस्पताल जनता को समर्पित होगा।
अस्पताल प्रबंधकों के दावे पर यकीन करें, तो यह देश की नहीं बल्कि पूरे एशिया में सबसे बड़ा और आधुनिक अस्पताल होगा। इस अस्पताल के शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर के लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा।
जिन्हें जरूरत पड़ने पर आधुनिक उपचार संबंधी सुविधाएं मिलेंगी। मेडिकल निदेशक संजीव सिंह के अनुसार ट्रस्ट की ओर से पहले से ही 11 बड़े अस्पताल संचालित हैं और इनमें कोच्चि में सबसे बड़ा 1350 बेड का अस्पताल है। अब यह 2600 बेड का अस्पताल होगा। जरूरतमंदों को रियायती दर पर उपचार के बारे में मेडिकल निदेशक ने कहा कि देश भर में विभिन्न अस्पतालों में जरूरतमंदों व निर्धन वर्ग को निश्शुल्क चिकत्सीय सुविधाएं दी जाती हैं, पर उससे पहले इसकी जांच की जाती है कि संबंधित की पृष्ठभूमि क्या है और क्या वास्तव में उसको जरूरत है। अस्पताल का आंतरिक आडिट भी होता है, जिसमें डाक्टर क्या दवा लिखते हैं, इस पर भी नजर रखी जाती है।
संवाददाता, (प्रदीप जैन) |

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