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उपभोक्ताओं को झटका – बढ़े बिजली के बिल

भोपाल,17 अगस्त 2022 (यूटीएन)। जुलाई अगस्त के बिजली के बिल लोगों को मिले हैं। इन बिलों ने करंट की तरह ही उपभोक्ताओं को झटका दिया है। बिलों को देखकर उपभोक्ता खासे परेशान हैं। जिन उपभोक्ताओं के बिल पहले 500 से 600 रुपए से ज्यादा नहीं आते थे, उनके बिल जुलाई-अगस्त 1500 रुपए तक पहुंच गए हैं। बिजली उपभोक्ता इसे गर्मी के कारण बिजली की अधिक खपत मान रहे थे लेकिन यह ज्यादा बिल सुरक्षा निधि के कारण आ रहे हैं। जो बिलों में जोड़कर दी जा रही है। बिजली कंपनी हर साल उपभोक्ताओं से सुरक्षा निधि की राशि वसूलती है। इसे उपभोक्ता की अमानत राशि बताया जाता है और इस पर ब्याज भी दिया जाता है। कंपनी वर्ष में तीन किस्तों में सुरक्षा निधि वसूलती है। इस बार जुलाई, अगस्त और सितंबर में किस्तों में वसूली की जा रही है और सुरक्षा निधि की राशि जोड़कर दी जा रही है। ज्यादा बिल देख कई उपभोक्ता बिजली कंपनी के कार्यालय में पूछताछ कर रहे हैं।

 

बिजली कंपनी के मुताबिक उपभोक्ता वर्षभर में जिस महीने अधिकतम बिजली खपत करता है, उसे आधार मानकर डेढ़ गुना राशि सुरक्षा निधि के रूप में जोड़ दी जाती है। बिजली कंपनी के अधिकारियों के अनुसार यदि किसी उपभोक्ता का बिल हर माह औसत 800 रुपए आता है तो उसे 1200 रुपए सालाना सुरक्षा निधि जमा कराना होती है, जो उसके बिल में 400-400 रुपए की तीन किश्त में जुड़कर आती है। सुरक्षा निधि की कुल राशि औसत बिल से डेढ़ गुना होती है तो इस पर मौजूदा बैंक की ब्याज दर के आधार पर सालाना ब्याज भी दिया जाता है। ज्यादा बिल को उपभोक्ता बिजली की खपत मान रहे थे लेकिन जब बिल में बिजली खपत (यूनिट) में ज्यादा अंतर मिला तो उपभोक्ताओं ने कंपनी कार्यालय से जानकारी ली। तब पता चला कि जो राशि बढ़कर आ रही है वो सुरक्षा निधि है। बिजली कंपनी इस वित्तीय वर्ष की सुरक्षा निधि राशि तीन किस्तों में वसूलेगी। पहली किस्त जुलाई के बिल में आ चुकी है। दो किस्त अगस्त व सितंबर के बिलों में वसूली जाएगी।

देश में जाति के आधार पर लोगों से भेदभाव की घटनाएं अभी भी जारी मीरा कुमार ने माना कि L नई दिल्ली । पूर्व लोकसभा स्‍पीकर और कांग्रेस नेता मीरा कुमार ने भी माना कि देश में जाति के आधार पर लोगों से भेदभाव की घटनाएं अभी भी जारी है। राजस्‍थान की इस स्‍तब्‍ध करने वाली घटना का उल्‍लेख करते हुए मीरा कुमार ने एक ट्वीट में कहा है, “100 साल पहले मेरे पिता बाबू जगजीवन राम को स्‍कूल में सवर्ण हिंदुओं के घड़े से पानी पाने से रोक दिया गया था। यह चमत्‍कार ही था कि उनकी जान बच गई। उन्‍होंने कहा कि आज इसी वजह से एक 9 वर्ष के दलित बच्चे को मार दिया गया। आज़ादी के 75 वर्षों के बाद भी जातिवाद हमारा सबसे बड़ा शत्रु है।

 

यह कलंक है।”दलितों के साथ 21वीं सदी में भी भेदभाव के मुद्दे पर एनडीटीवी के समक्ष विचार रखते हुए मीरा कुमार ने कहा, “जो भी हुआ है वह बेहद भयावह है। 100 साल पहले मेरे पिता बच गए थे लेकिन 100 साल बाद बच्‍चे को जान गंवानी पड़ी।”उन्‍होंने कहा, “मैंने एक बार अपने पिता बाबू जगजीवन राम जी से पूछा था कि आपने इस देश के लिए आजादी की लड़ाई क्‍यों लड़ी? आपने यह जोखिम क्‍यों लिया? इस देश ने आपके लिए और दलित वर्ग के लिए कुछ नहीं किया, आप लोगों को तो अपमान और अत्‍याचार ही झेलना पड़ा तो उन्‍होंने कहा था कि आजाद भारत बदलेगा। हमें जातिविहीन समाज मिलेगा। मुझे खुशी है कि ऐसी घटनाओं को सुनने के लिए आज वे नहीं हैं। आजादी के 75 साल भी इस मामले में भारत ने बदला है। यह बेहद दुखद है।

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