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बच्चों में असामान्य छोटी हाइट होने का कारण क्या जेनेटिक बीमारी हो सकती है

नई दिल्ली, 27 जुलाई 2022 (यू.टी.एन.)। हाइट का उतार-चढ़ाव सामान्य रूप से परिवार से मिले जीन्स से होता है, लेकिन असामान्य रूप से छोटी हाइट का कारण बच्चे के जीन में बदलाव हो सकता है जिसका बहुत बड़ा असर हाइट पर पड़ता है। सर गंगा राम अस्पताल के इंस्टिट्यूट ऑफ़ जेनेटिक्स एन्ड जेनोमिक्स* के द्वारा हाल ही में असामान्य रूप से छोटी हाइट के बच्चों पर एक शोध किया गया। यह अध्ययन ऐसे 455 बच्चों पर किया गया जो अस्पताल में 1 जनवरी 2017 से 31 अक्टूबर 2018 (22 महीने) में आये जिनकी हाइट (यानि कि 100 में से सिर्फ 3 से कम बच्चे इस बच्चे से छोटे थे ) से कम थी।  इनकी उम्र 10 महीने से 16 वर्ष तक की थी।
यह स्टडी (अध्ययन) 15 जून के “इंडियन पीडियाट्रिक्स संस्करण में हाल ही में प्रकाशित किया गया। 
*डॉ. रत्ना दुआ पुरी, चेयरपर्सन, इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल जेनेटिक्स एंड जीनोमिक्स, सर गंगा राम अस्पताल के अनुसार,* “इस शोध में हमने ऐसे बच्चे, जिनमे अन्य कारणों के अलावा हाइट का असामान्य रूप से छोटा रहना एक कारण  था उनमे जेनेटिक कारण पता लगाने की कोशिश की।”
*डॉ. रत्ना दुआ पुरी ने आगे कहा,* “किसी भी इंसान में हाइट का लम्बा या छोटा होने का मुख्य कारण जेनेटिक होता है। हालांकि बहुत सारेऐसे कारण है जिसकी वजह से शरीर की वृद्धि में गड़बड़ आ जाती है, हमारी स्टडी में यह पाया गया कि ठीक से किये गये क्लीनिकल एग्जामिनेशन (लक्षण एवं शारीरिक परिक्षण) के द्वारा इनके कारण का पता लगाया जा सकता है। *स्टडी में 65% बच्चों में असामान्य छोटी हाइट का कारण क्लीनिकल  एग्जामिनेशन द्वारा पता लगा लिया गया। बाकियो में उनके क्लीनिकल प्रोफाइल के हिसाब से अतिरिक्त जेनेटिक टेस्ट कराये गए।”*
हाइट का उतार-चढ़ाव सामान्य रूप से परिवार से मिले जीन्स से होता है, लेकिन असामान्य रूप से छोटी हाइट का कारण बच्चे के जीन में बदलाव हो सकता है जिसका बहुत बड़ा असर हाइट पर पड़ता है।
हमारी स्टडी में 455 असामान्य छोटी हाइट के बच्चों को शामिल किया गया जो 10 महीने से 16 वर्ष के थे।  इनमें से 226 मरीजों को डिटेल्ड जेनेटिक टेस्टिंग  एवं फेनोटाइपिंग से कारणों की जाँच की गई जबकि 229 मरीजों में प्रारंभिक हिस्ट्री, शारीरिक जाँच एवं टेस्ट द्वारा छानबीन द्वारा की गई। इनमे से 63% (142) में छोटा कद (शरीर के ऊपरी एवं निचले हिस्से असामान्य रूप से छोटे)* पाया गया। जिसमे से 65% (93) को जानी पहचानी जेनेटिक बीमारियाँ पायी गई जैसे की – टर्नर सिंड्रोम विलियम सिंड्रोम एवं रासओपेथीज़ आदि।
226 में से बाकी बचे 84 बच्चे (37%) में छोटा कद (शरीर के ऊपरी एवं निचले हिस्से में से एक असामान्य रूप से छोटा)* पाया गया। इनमे से 45% (38) में lysosomal storage genetic disorder पाया गया। 44% (37) बच्चों में Skeletal Dysplasias पाया गया। 8% (9) बच्चों में कारण नहीं पता चला।
*डॉ. रत्ना दुआ पुरी ने कहा,* “अगर परिवार के अंदर बच्चे मेंअसामान्य रूप से लंबाई छोटी हो और शरीर का विकास धीमी गति से हो रहा हो तो मेडिकलएक्सपर्ट की राय लेना बहुत आवश्यक है। आजकल जेनेटिक फील्ड में कई नए टेस्ट आ चुके हैऔर इनकी कीमत भी गिर चुकी है। सही जेनेटिक सलाह एवं जांच से कारण का पता चलसकता है और इलाज की शुरुआत की जा सकती है।“
प्रदीप जैन, दिल्ली |

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