Hindi English Marathi Gujarati Punjabi Urdu
Hindi English Marathi Gujarati Punjabi Urdu

भारत में 50 फीसदी से अधिक मरीज़ अपनी कैटेरेक्ट सर्जरी में करते हैं देरीः एक सर्वेक्षण ने बताया

नई दिल्ली, 28 जून 2022 (यू.टी.एन.)। देश में आंखों की रोशनी जाने का एक मुख्य कारण है कैटेरेक्ट यानि मोतियाबिंद; हालांकि आसान सी सर्जरी के द्वारा इसका इलाज संभव है, जिसमें सफलता की दर 98 फीसदी से भी अधिक होती है। नेशनल आई इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार कैटेरेक्ट सर्जरी कराने वाले हर 10 में 9 लोगों की आंखें ठीक हो जाती हैं, उन्हें सर्जरी के बाद फिर से साफ दिखाई देने लगता है। कैटेरेक्ट आमतौर पर 40 वर्ष या इससे अधिक उम्र के लोगों को होता है। कैटेरेक्ट जागरुकता माह के अवसर पर प्रिस्टाईन केयर ने ‘द ग्रेट इंडिया कैटेरेक्ट सर्वे रिपोर्ट’ पेश की, आंखों की देखभाल के बारे में जागरुकता बढ़ाना इसका मुख्य उद्देश्य है। यह सर्वेक्षण महानगरों के 1000 से अधिक लोगों पर किया गया, जिनमें अब तक कैटेरेक्ट की सर्जरी की जा चुकी है। आंकड़ों का विश्लेषण प्रिस्टाईन केयर डेटा लैब ने किया।

सर्वेक्षण के मुताबिक 50 फीसदी से अधिक भारतीय मरीज़ कैटेरेक्ट सर्जरी कराने में देरी करते हैं। क्योंकि ज़्यादातर मरीज़ों को यह लगता है कि कैटेरेक्ट सर्जरी कराने से उनकी आंखों की रोशनी जा सकती है, या इस सर्जरी में उन्हें दर्द होगा या सर्जरी के बाद ठीक होने में लम्बा वक़्त लगेगा। सर्जरी कराने वाले 52 फीसदी मरीज़ों ने अनुभवी सर्जन को चुना, 41 फीसदी मरीज़ों ने आधुनिक टेकनोलॉजी को महत्व दिया जबकि 26 फीसदी मरीज़ों ने सर्जरी की लोकेशन यानि नेत्र अस्पताल और क्लिनिक के आधार पर फैसला लिया। 24 फीसदी मरीज़ों ने सर्जरी को लागत को ध्यान में रखते हुए सर्जरी का फैसला लिया। सर्वेक्षण के परिणामों पर बात करते हुए डॉ कृपा पुलासारिया, ऑप्थेेल्मोलोजिस्ट ने कहा, ‘‘कैटेरेक्ट सर्जरी में देरी के कई कारण हो सकते हैं |

विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)

इसे भी पढे ----

वोट जरूर करें

क्या आपको लगता है कि बॉलीवुड ड्रग्स केस में और भी कई बड़े सितारों के नाम सामने आएंगे?

View Results

Loading ... Loading ...

आज का राशिफल देखें 

[avatar]