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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर उफान कभी इस गली में तो कभी उस गली में समाजसेवी करते हुए झूठे वादे व बातों की बौछार

गढ़वा, 25 मई 2022 (यू.टी.एन.)। इनदिनों त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर प्रत्याशियों में उफान सा आ गया है। कभी इस गली में तो कभी उस गली में कोई न कोई अपने आप को समाजसेवी कहते हुए झूठे वादों व बातों की बौछार करते हुए नजर आ ही जाएंगे। अपने आप को सच्चे व अच्छे कहने में तनिक भी लजाते या शर्माते नहीं हैं। चुनाव जीतने से पहले तरह तरह की बातें व वादे करने से नहीं थकते। भोली-भाली जनता को तरह तरह की लुभावनी बातें करके मोहने का बहुतेरे प्रयत्न करते हैं। वही भोली-भाली जनता उनकी मिठी-मीठी बातों में आकर उन्हें अपना बहुमूल्य मत देकर विजयी बना देती है। क्योंकि समाजसेवी कह कर हाथ जोड़कर पैर पकड़ कर इस तरह पेश आते हैं कि जनता उनकी बातों में फंस ही जाती है। बाद में वही ढोंगी समाजसेवी जो भोली-भाली जनता को छलने का काम करता है।
केवल इतना ही नहीं प्रत्याशी तो 5 वर्षों में केवल एक बार ही हाथ जोड़ते हैं। जब चुनाव आता है और जनता को लगातार 5 वर्षों तक हाथ जोड़ते रहना है। जब तक उनका चप्पल घिस कर टूट न जाए। केवल इतना ही नहीं चुनाव जीतने के बाद मूंछ पर ताव देते हुए कागजी घोड़ा खूब दौड़ाते हैं। पंचायत में गांव की सरकार तो इसलिए बनाई जाती है कि गांव व मुहल्ले में विकास हो, किन्तु विकास के नाम पर खानापूर्ति करते नहीं थकते। इसी प्रकार का एक मामला प्रकाश में आया है कि मुखिया ने जलमीनार लगवाया था। जो एक बूंद भी पानी टपकाने से असमर्थ है। क्योंकि मात्र 20 फिट ही बोर है। जिसमें जलमीनार लगा है। भीष्ण गर्मी में तो होंठ हमेशा प्यासा ही रहता है। ग्रामीणों को उक्त जलमीनार से कोई लाभ नहीं है। क्योंकि वह तो नुमाइश का एक साधन बन मंत्रमुग्ध स्थिति में खड़ा है। साथ ही सटे मुख्य सड़क से आवागमन करने वाले पथिक प्यास बुझाने को जलमीनार के पास जाते ही मायूस इस कदर हो जाते हैं। जैसे विकास आंसू तो बहा ही रहा है। किन्तु जलमीनार पानी नहीं दे रहा।
ग्रामीणों ने बताया कि मुखिया के द्वारा 20 फिट गहरा बोर में तकरीबन 6 माह पूर्व जलमीनार लगवाया गया था। गर्मी में पानी का स्तर नीचे चला गया। 3 महीने से खराब जलमीनार पर मुखिया का ध्यान तो गया ही होगा। किन्तु शायद उन्होंने उसे उपयोगी बनाना मुनासिब नहीं समझा। फिर से चुनाव में वो आ गए। जनसम्पर्क कर रहे हैं कि मुझे समर्थन दीजिए, विकास होगा। अब जनता को पहेलियां समझना होगा। पहेलियां यह कि शिकारी आएगा, जाल बिछाएगा, दाना डालेगा फंसना मत। स्पष्ट शब्दों में कहें तो प्रत्याशी मुर्गा, दारू व पैसे दे कर जनता से केवल वोट लेने की उम्मीद रखते हैं। हालाकि जनता समझदार है। सब कुछ जानती है। यह मामला है जिले के कांडी प्रखण्ड क्षेत्र अंतर्गत बलियारी पंचायत के जमुआ गांव की।
उक्त गांव स्थित ब्रह्म बाबा के समीप एक जलमीनार 6 माह पूर्व ही लगा था। तीन महीने तो किसी प्रकार पानी दिया। गर्मी में पानी का स्तर नीचे चल जाने से अब वह जलमीनार एक बूंद भी पानी उगलने में आना-कानी कर रहा है। ग्रामीणों ने उक्त सभी बातों की जानकारी देते हुए कहा कि कब तक यह जलमीनार बनेगा, कोई उम्मीद तक नहीं है। जलमीनार उपयोगी सिद्ध नहीं होने पर लोगों में आक्रोश व्याप्त है। आक्रोशित होने वालों में अरुण कुमार, विकाश कुमार, नीतीश कुमार, अजय कुमार, रोहित कुमार, गुड्डू कुमार, नीरज कुमार, छोटू कुमार, बीरेंद्र कुमार, नीरज कुमार चंद्रवंशी सहित दर्जनों लोगों का नाम शामिल है। वहीं इस संबंध में पूछने के लिए तकरीबन पौने दो बजे मोबाइल से कॉल किया गया। किन्तु मुखिया प्रतिनिधि सत्येंद्र साह ने कॉल रिसीव नहीं किया।
झारखंड-स्टेट ब्यूरो, (विवेक चौबे)।

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